ध्यान (meditation)

‘मुस्कुराइए आप धरती पर हैं’

हमारे शरीर में नकारात्मक भावनाओं के स्थान पर परमानन्द और शांति की तरंगों को लंबे समय तक बनाए रखने की क्षमता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सकारात्मकता हमारे अस्तित्व के केंद्र में है। जिस प्रकार से अणु की संरचना में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन केंद्र में रहते हैं और इलेक्ट्रॉन परिधि पर होते हैं, उसी प्रकार से हमारे अस्तित्व के मूल में परमानंद, सकारात्मकता और आनंद है। नकारात्मक आयन केवल सतह पर मौजूद रहते हैं। हम ध्यान एवम् विशेष श्वसन तकनीकों की मदद से अपनी नकारात्मक भावनाओं को सरलता से मिटा सकते हैं।

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भविष्य में, ऐसा कानून आ सकता है कि यदि कोई व्यक्ति अवसादग्रस्त है, तो उसे 10,000 रुपए का अर्थदंड देना होगा ! तब,आपको बिना कोई दवाई खाए हुए,अपने अवसाद से छुटकारा पाने के लिए श्वसन अभ्यास और ध्यान करने के लिए कहा जाएगा।आप किस बात के लिए अवसादग्रस्त हैं। वैसे भी,आप इस धरती पर कुछ वर्षों के लिए ही हैं। आप जितने समय तक यहां पर हैं, तब तक आप खुश रह सकते हैं।

जीवन के पास आपको देने के लिए बहुत कुछ है। आप इसे केवल तभी देख सकते हैं, जब आप अपनी आत्मा को पुनर्जीवित करने के लिए थोड़ा समय निकालें। आपकी आत्मा आपके मुस्कुराने की प्रतीक्षा कर रही है। यदि आप केवल इतना कर पाएं, तब आप पूरे साल ऊर्जावान महसूस करेंगे और कोई भी बात आपकी मुस्कान को आपसे नहीं छीन पाएगी।

~ गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के व्याख्यानों से उद्घृ

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