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  1. वास्तुशास्त्र को कितना महत्व दिया जाना चाहिए?

    श्री श्री रवि शंकर वास्तुशास्त्र का इतिहास वास्तुशास्त्र अपने आप में एक प्रकार का विज्ञान है। प्राचीन काल में इस विज्ञान का जन्म एव ...
  2. आदतें और संकल्प (प्रतिज्ञा) | Habits and vows in Hindi

    व्यसन (आदत) से मुक्ति कैसे पाया जाए? जो लोग अपनी आदतों से मुक्ति पाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बड़ा प्रश्न है। हम आदतों से मुक्ति चाहते हैं क्योंकि ये हमें पीड़ा देती हैं और बंधन में बांधती हैं। व्यसन हमें कष्ट देते हैं और सीमित करते हैं जबकि जीवन उन्मुक्त ...
  3. शिव स्वंय अपने पुत्र को कैसे नहीं पहचान सके? | How Shiva Did Not Recognize His Own Son?

    पुराणों में बहुत सी असाधारण एवं अविश्वसनीय घटनाएँ उल्लिखित हैं। परंतु इन घटनाओं का अभिप्राय बच्चों की कहानियों की तरह से नहीं लगाना चाहिए। इन घटनाओं व कहानियों में प्रयुक्त भाषा शेक्सपीयर के नाटकों में प्रयुक्त भाषा की तरह है जिसमें बहुत से गूढ़ार्थ निहित ...
  4. [[{"fid":"87605","view_mode":"default","fields":{"format":"default","field_file_image_alt_text[und][0][value]":"dattatreya jayanti significance","field_file_image_title_text[und][0][value]":"dattatreya jayanti significance"},"type":"media","field_deltas":{"2":{"format":"default","field_file_image_alt_text[und][0][value]":"dattatreya jayanti significance","field_file_image_title_text[und][0][value]":"dattatreya jayanti significance"}},"link_text":null,"attributes":{"alt":"dattatreya jayanti significance","title":"dattatreya jayanti significance","class":"media-element file-default","data-delta":"2"}}]] गुरूजी आज दत्तात्रेय जयंती है। हमें दत्तात्रेय के विषय में कुछ बताइए। जन्मदिन या जयंती का आयोजन उत्सव मनाने और उस व्यक्ति में विद्यमान सद्गुणों को याद करने के लिए किया जाता है। दत्तात्रेय ने सृष्टि में उपस्थित समस्त समष्टि से ज्ञान प्राप्त किया था। अत्रेय ऋषि की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने दत्ता को गोद ले लिया। दत्ता या दत्त का अर्थ होता है- दिया हुआ, पाया हुआ या अपनाया हुआ। इसीलिए जब कोई किसी बच्चे को गोद लेता है तो उसे “दत्त स्वीकरा” कहा जाता है। अतः जब आत्रेय और अनुसूया ने बच्चे को गोद लिया तो उसे “दत्तात्रेय” कहा गया। त्रिशक्तियों का साथ होना “गुरु शक्ति” है! इस बालक में ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव, तीनों की ही शक्तियां विद्यमान थीं। सृजनशीलता अनेक लोगों में होती है, पर सभी लोग इसका सदुपयोग नहीं कर पाते। कुछ लोग आरंभ तो अच्छा कर देते हैं लेकिन उसे निरंतर बनाए नहीं रख सकते। सृजनशीलता ही "ब्रह्मा शक्ति" है। यदि हमारे भीतर ब्रह्मा शक्ति है, तो हम सृजन तो कर लेते हैं परन्तु ये नहीं जानते कि उसे कायम कैसे रखा जाए। किसी काम या बात को बनाए रखना, कायम रखना “विष्णु शक्ति” है। हमें ऐसे अनेक लोग मिल जाते हैं जो अच्छे प्रबंधक या पालक होते हैं। वे सृजन नहीं कर सकते परन्तु यदि उन्हें कुछ सृजन कर के दे दिया जाए तो वे उसे अत्युत्तम ढंग से निभाते हैं। अतः व्यक्ति में विष्णु शक्ति अर्थात सृजित को बनाए रखने की शक्ति का होना भी अत्यंत आवश्यक है। इसके बाद आती है ‘शिव शक्ति’ जो परिवर्तन या नवीनता लाने की शक्ति होती है। अनेक लोग ऐसे होते हैं जो चल रही किसी बात या काम को केवल कायम या बनाए रख सकते हैं परन्तु उन्हें ये नहीं पता होता है कि परिवर्तन कैसे लाया जाता है या इसमें नए स्तर तक कैसे पँहुचा जाए। इसलिए शिव शक्ति का होना भी आवश्यक है। इन तीनों शक्तियों का एक साथ होना “ गुरु शक्ति ” है। गुरु या मार्गदर्शक को इन तीनों शक्तियों का ज्ञान होना चाहिए। दत्तात्रेय की भीतर ये तीनों शक्तियां विद्यमान थीं, इसका अर्थ ये हुआ कि वे गुरु शक्ति के प्रतीक थे। मार्गदर्शक, सृजनात्मकता, पालनकर्ता एवं परिवर्तनकर्ता सभी शक्तियां एक साथ! दत्तात्रेय ने हर एक चीज से सीखा। उन्होंने समस्त सृष्टि का अवलोकन किया और सबसे कुछ न कुछ ज्ञान अर्जित किया। असंवेदनशील से संवेदनशीलता की राह पर चलें! श्रीमद भागवत में उल्लिखित है कि "यह बहुत ही रोचक है कि उन्होंने कैसे एक हंस को देखा और उससे कुछ सीखा, उन्होंने कौवे को देख कर भी कुछ सीखा और इसी प्रकार एक वृद्ध महिला को देख कर भी उससे ज्ञान ग्रहण किया।" उनके लिए चारों तरफ ज्ञान बह रहा था। उनकी बुद्धि और ह्रदय ज्ञानार्जन एवं तत्पश्चात उसे जीवन में उतारने के लिए सदैव उद्यत रहते थे। अवलोकन (प्रेक्षण) से ज्ञान आता है और अवलोकन या प्रेक्षण के लिए संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। यदि हम अपनी ही दुनिया में उलझ के रह गए हैं तो हम अपने आस-पास के लोगों से मिलने वाले संदेशों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं। जब लोग अपनी बातों को ज्यादा महत्त्व देने लगते हैं तो दूसरों के दृष्टिकोण पर उनकी नज़र जाती ही नहीं है। और ऐसे लोग ये भी मानते हैं कि उनकी धारणा बिलकुल सही है जबकि हम जानते हैं कि वे सही नहीं हैं।

    गुरूजी आज दत्तात्रेय जयंती है। हमें दत्तात्रेय के विषय में कुछ बताइए। जन्मदिन या जयंती का आयोजन उत्सव मनाने और उस व्यक्ति में विद्यमान सद्गुणों को याद करने के लिए किया जाता है। दत्तात्रेय ने सृष्टि में उपस्थित समस्त समष्टि से ज्ञान प्राप्त किया था। अत्रेय ...
  5. रक्षा बंधन और यज्ञोपवीत संस्कार का महत्त्व | Raksha Bandhan and thread ceremony importance in Hindi

    बुध, 2012
    तीन ऋण कोनसे है ? आज श्रावण पूर्णिमा है। इससे पिछली पूर्णिमा ‘गुरु पूर्णिमा‘ गुरु और शिक्षिकों को समर्पित है। उससे पहले बुध पूर्णिमा और उससे पहले चैत्र पूर्णिमा थी। सो यह चौथी पूर्णिमा को श्रवण पूर्णिमा कहा जाता है और यह पूर्णिमा भाई बहन के प्रेम को समर्प ...
  6. राम का अर्थ है, मेरे भीतर प्रकाश, मेरे हृदय में प्रकाश | Ram means the light within me, the light in my heart

    राम का अर्थ है ‘प्रकाश’। किरण एवं आभा (कांति) जैसे शब्दों के मूल में राम है। ‘रा’ का अर्थ है आभा (कांति) और ‘म’ का अर्थ है मैं, मेरा और मैं स्वयं। राम का अर्थ है मेरे भीतर प्रकाश, मेरे ह्रदय में प्रकाश। निश्चय ही ‘राम’ ईश्वर का नाम है, जो इस धरती पर 7560 ...
  7. होली उत्सव का रहस्य और पूरी जानकारी | Holi utsav ka rahasya aur puri janakari

    हैप्पी होली 2017 | Happy Holi 2017 | होली उत्सव की शुभकामनाएं होली भारत का बहुत ही लोकप्रिय और हर्षोल्लास से परिपूर्ण त्यौहार है। लोग चन्दन और गुलाल से होली खेलते हैं। प्रत्येक वर्ष मार्च माह के आरम्भ में यह त्यौहार मनाया जाता है। लोगों का विश्वास है कि ह ...
  8. श्रीमद्‍ भगवत गीता और आतंकवाद | Bhagavad Gita and Terrorism in Hindi

    आतंकवादी डरपोक होते हैं। जब भी विश्व के किसी भी भाग में आतंकवाद की कोई घटना होती है, तब हम सब लोगों से यही सुनते हैं कि यह एक कायरता का कार्य है। एक डरपोक व्यक्ति कार्य से तो भाग जाता है लेकिन अपने मन में नकारात्मक भावनाओं को भरे रहता है और चोरी-छिपे ऐसे ...
  9. Take Up The Challenge

    गुरु, 2016
    (Below is a continuation of the post Truth Gives You Strength) Gurudev, could you give us a concrete five point agenda that each citizen can do to create a divine society. Sri Sri Ravi Shankar: 1) Be stress free - keep your body, mind and spirit free from ...
  10. गुरुदेव, ऐसा कहा गया है कि जब रामकृष्ण परमहंस ने अपना एक पैर स्वामी विवेकानंद के ऊपर रख दिया था, तब उन्हें अचानक समाधि का अनुभव हो गया था| आपने मेरे सिर पर अपना हाथ बहुत बार रखा है, आप अपना पैर कब मेरे सिर पर रखेंगे?

    श्री श्री रविशंकर – मेरे प्रिय, मैंने आपको सबसे सुन्दर तकनीक ‘सुदर्शन क्रिया’ दे दी है| आप पहले ही वो अनुभव कर चुके हैं, जो स्वामी विवेकानंद को हुआ था; एक तरंग और शून्यता का भाव| क्या इससे आपका सम्पूर् ...
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