Meditation

ध्यान, एक निःशुल्क अवकाश

How to Meditate

काश कि हर दिन रविवार होता!...मैं अपने काम में इतना व्यस्त हूँ; काश कि मैं छुट्टी (हॉलिडे) ले पाता...इतने काम के होते किसे छुट्टी लेने का समय है?... आप मज़ाक कर रहे हैं! आपको पता भी है कि किसी हिल स्टेशन की  3-4 दिन की छुट्टी की कीमत क्या है?... मैं पिछले कई महीनों से पैसे बचा रहा हूँ पर जा नहीं पाया...काश कि कोई श्वेत परों के साथ देवदूत धरती पर आए और हमें एक निःशुल्क अवकाश (फ्री रिट्रीट) पर ले जाए....

क्या ये सब सामान्य और आमतौर पर होने वाली बातचीत नहीं है जो हम स्वयं से या मित्रों से करते रहते होंगे? अच्छी बात तो ये है कि ऐसा निःशुल्क अवकाश सच में संभव है। और आप स्वयँ ही देवदूत बनकर खुद को यह उपहार दे सकते हैं।

आप अपने जीवन में, हर रोज़ एक छोटी छुट्टी पर जा सकते हैं। बस आपको २० मिनट तक आँख बंद कर ध्यान (मेडिटेशन) के लिए बैठना है; और आप अंतर्यात्रा के लिए तैयार हैं।

स्वयं ट्रॅवेल एजेंट बनें, और पाएँ सबसे अच्छा सौदा

ध्यान अपने अंतर्मन की यात्रा पर जाने के समान है। ये एक ऐसा उम्दा तोहफा है जो आप स्वयं को दे सकते हैं, और, जो कोई ट्रॅवेल एजेन्सी नहीं दे सकतीl ये बिल्कुल मुफ़्त है, जिस में डेली पैकेज है जो आपको रोज़ छुट्टी मनाने की सुविधा देता है। इस के साथ साथ कई अतिरिक्त लाभ भी मिलेंगे, जैसे कि, मन की शांति, एक नये आप जो प्रसन्न भी हैं और शन्तिमय भी, अपने कार्य में और भी अधिक निपुणता एवं अपने समय को पूर्ण रूप से संयोजित करने की क्षमताl

अदिति वशिष्ठ अपना अनुभव बताती हैं, "मुझे पता है कि एक तनावपूर्ण ( स्ट्रेसफुल ) दिन के पश्चात्, सहज समाधि ध्यान द्वारा मुझे विश्राम मिलेगा और मैं पूरी तरह तरोताज़ा और पुनः ऊर्जित हो जाऊंगी। मैं ख़ुद को इससे बेहतर अवकाश नहीं दे सकती। हर दिन एक छुट्टी!"

 

 

हर दिन एक अलग छुट्टी पर जाएँ

विभिन्न अनुभवों के लिए आप हर बार छुट्टी पर अलग अलग स्थानों पर जाते हैंl इसी तरह ध्यान भी आपको हर रोज़ एक अलग अनुभव देता है। छुट्टी के लिए कोई योजना बनाने की मेहनत किए बिना हर रोज़ एक नई छुट्टी पर जाने के जैसा है। आपको बस २० मिनट आँखें बंद करके बैठना है और इस अंतर्यात्रा के सौंदर्य का आनंद अनुभव करना है। “पहले मैं नये अनुभवों के लिए विभिन्न हिल स्टेशन पर जाती थी। पर अब रोज़ ध्यान मुझे घर बैठे नये नये अनुभव करा देता है”, दीप्ति सचदेव कहती हैंl

एक छुट्टी जो कभी थकान न दे

कल्पना करें कि आप एक सुहानी सुबह के समय, किसी पर्वत की चोटी पर खड़े हैं, और आनंद ले रहे हैं चारों ओर फैली मनमोहक हरियाली का, जहाँ साथ ही पक्षी चहचहा रहे हैं, जैसे प्रकृति खुद का कोई गीत गा रही हो। हल्की हल्की ठंडी हवा भी चल रही है जो कि छुट्टी के लिए एकदम उपयुक्त है। तब क्या होता है? आप आँखे बंद कर इन अनुभवों के बीच डूब जाना चाहते हैं। आप इन क्षणों को अपने साथ सदा के लिए रखना चाहते हैं, क्योंकि इन पलों में आप स्वयं में गहरे उतर जाते हैं। ध्यान भी आपको ऐसे ही अनुभव देता है।

छुट्टी को वापसी (रिट्रीट) भी कहते हैं, क्योंकि ये आपको विश्राम देने के लिए बनी है। लेकिन अक्सर आप छुट्टी से वापस आने के बाद थके लौटते हैं और विश्राम के लिए एक दिन और चाहिए होता है।

परंतु ध्यान और छुट्टियों में एक असमानता भी हैl ध्यान एक ऐसा अवकाश है जिसके बाद आप थकते नहीं हैंl वास्तव में ध्यान आपको एक गहरा विश्राम देता हैl जब आप ध्यान से बाहर आते हैं, तब आप इतने अधिक ऊर्जित होते हैं कि आप जितना भी चाहें काम कर सकते हैं.  अर्चा घोड़गे कहती हैं, "मैं खुद को प्रतिदिन कुछ मिनटों की छुट्टी देती हूँ, जो मेरे दिन को एक सुंदर शुरुआत देती है और मैं मुस्कराते हुए बिना थके काम कर पाती हूँ।"

कम समय में ज़्यादा लाभ

जिन्हें लगता है कि समय अति बहुमूल्य एवं धनतुल्य है, वे इन 20 मिनटों को भी किसी लाभकारी काम में लगाना चाहेगें। फिर भी आप इन 20 मिनटों को ध्यान के लिए दे दीजिए। आपकी बाकी समय को उपयोग करने की क्षमता बढ़ जाएगीl आप समय को नियंत्रित कर पाएँगे और उसे अपने हिसाब से उपयोग कर पाएँगेl किरण सिंह बताते हैं, "मैं एक ऐसी जॉब में हूँ जिसमें बस कुछ मिनटों में ही डील करनी होती है। पहले मैं सोचता था कि अगर 20 मिनट ध्यान किया तो उन 20 मिनटों की सारी डीलें छूट जाएँगीं। लेकिन अब रोज ध्यान के बाद मुझे लगता है कि मैं सही डील करने में ज़्यादा सक्षम हो गया हूँ और ज़्यादा कमा रहा हूँl”

आप का यात्रा में स्वागत है

अब अगर आप छुट्टी पर जाने के लिए तैयार हैं, तो अपनी सीट बेल्ट बाँध लें और शुरू हो जाएँ। आप इस यात्रा पर जाने के लिए कोई भी आरामदायक जगह चुन सकते हैंl आप इस यात्रा पर अकेले जा सकते हैं या फिर ध्यान करने वाले कुछ मित्रों को भी बुला सकते हैं। समूह में किया गया ध्यान गहरे अनुभव देता है। ये यात्रा दिन के किसी भी समय शुरू कर सकते हैं, यद्यपि सुबह का समय सब से अच्छा होता है। इस समय का ध्यान आपको दिन भर शांत रहने में मदद करता है ।

इस छुट्टी पर जाने के लिए रुक नहीं पा रहे हैं! जल्दी से जल्दी अपने घर के पास होने वाले सहज समाधि कोर्स को करेंl आप कुछ ध्यान की विधियाँ अपने आइ-पॉड में डाउनलोड भी कर सकते हैं; या अनुभव के लिए ऑनलाइन ध्यान भी कर सकते हैं।

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श्री श्री रविशंकर जी की ज्ञान वार्ता से उद्धृत

लेख दिव्या सचदेव द्वारा | ग्राफ़िक्स निलाद्री दत्ता द्वाराl


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