राम का अर्थ है, ‘प्रकाश’। किरण एवं आभा (कांति) जैसे शब्दों के मूल में राम है। ‘रा’ का अर्थ है, आभा और ‘म’ का अर्थ है, मैं; मेरा और मैं स्वयं। राम का अर्थ है, मेरे भीतर का प्रकाश, मेरे ह्रदय में प्रकाश। निश्चय ही ‘राम’ ईश्वर का नाम है, जो इस धरती पर 7560 ईसा पूर्व अर्थात 9500 वर्ष पूर्व अवतरित हुए थे।

राम नवमी तथा राम जन्म का गूढ़ ज्ञान

राम नवमी, भगवान श्री राम के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हर्ष एवं उल्लास के इस पर्व के मनाए जाने का उद्देश्य है – हमारे भीतर “ज्ञान के प्रकाश का उदय”। भगवान राम का जन्म राजा दशरथ और रानी कौशल्या के यहाँ हुआ था।

कौशल्या का अर्थ है, कुशलता और दशरथ का अर्थ है, जिसके पास दस रथ हों। हमारे शरीर में 10 इंद्रियाँ हैं, 5 ज्ञानेन्द्रियाँ (पांच इन्द्रियों के लिए) और 5 कर्मेन्द्रियाँ, ( दो हाथ, दो पैर, जननेंद्रि, उत्सर्जन अंग और मुँह)।

सुमित्रा का अर्थ है, जो सब के साथ मैत्री भाव रखे और कैकयी का अर्थ है, जो बिना स्वार्थ के सब को देती रहे।

इस प्रकार दशरथ और उनकी तीन पत्नियाँ एक ऋषि के पास गए। जब ऋषि ने उनको प्रसाद दिया, तब ईश्वर की कृपा से, भगवान राम का जन्म हुआ।

भगवान राम स्वयं का प्रकाश हैं, लक्ष्मण (भगवान राम के छोटे भ्राता) का अर्थ है सजगता, शत्रुघ्न का अर्थ है जिसका कोई शत्रु ना हो या जिसका कोई विरोधी ना हो। भरत का अर्थ है योग्य।

अयोध्या (जहाँ राम का जन्म हुआ है) का अर्थ है, वह स्थान जिसे नष्ट ना किया जा सके।

रामायण का सार

इस कहानी का सार है: हमारा शरीर अयोध्या है, 5 ज्ञानेन्द्रियाँ और 5 कर्मेन्द्रियाँ इस के राजा हैं। कौशल्या इस शरीर की रानी है। सभी इन्द्रियाँ बहिर्मुखी हैं और बहुत कुशलता से इन्हें भीतर लाया जा सकता है और ये तभी हो सकता है, जब भगवान राम, प्रकाश हम में जन्म लें।

भगवान राम का जन्म नवमी के दिन हुआ था (हिन्दू पंचांग के अनुसार नौवां दिन)। इस दिन का अपना महत्व है। 

जब मन (सीता) अहंकार (रावण) के द्वारा अपहृत हो जाता है, तो दिव्य प्रकाश और सजगता (लक्ष्मण) के माध्यम हनुमान (प्राण के प्रतीक) के कंधों पर चढ़कर उसे घर वापस लाया जा सकता है। यह रामायण हमारे शरीर में हर समय घटित होती रहती है।

राम नाम तथा रामायण का प्रचलन

भगवान राम का सम्बन्ध सभी एशियाई महाद्वीपों से है। इंडोनेशिया, मलेशिया और कम्बोडिया का पूरा बेल्ट रामायण से जुड़ा हुआ है।   

यह बेहद पुराना महाकाव्य, ग्रन्थ है। इसका प्रभाव इतना अधिक है कि हजारों वर्षों बाद, आज भी भगवान राम अपनी सच्चाई के लिए जाने जाते हैं। उन्हें पुरुषोत्तम भी कहा जाता है; एक आदर्श सम्राट। एक बार महात्मा गांधी ने कहा था, ‘आप मेरा सब कुछ ले लीजिए, मैं तब भी जीवित रह सकता हूँ। परन्तु यदि आपने मुझसे राम को दूर कर दिया, तो मैं नहीं रह सकता।’

उन्होंने मृत्यु से पूर्व जो अंतिम शब्द कहे थे, वह ‘हे राम!’ थे। भारत के लगभग हर क्षेत्र में राम को पाया जा सकता है। हर राज्य में हमें एक ‘रामपुर’ या एक ‘रामनगर’ मिल ही जाएगा! हर जगह, किसी पत्र पर केवल ‘रामनगर’ लिखने से डाक विभाग भ्रमित हो जाएगा। भारत में हजारों ‘रामनगर’ हैं। अध्ययन से पता चला है कि ‘यूरोप’ में भी राम से सम्बंधित हजारों नाम हैं।

आस्ट्रेलिया को संस्कृत में अस्त्रालय कहा जाता है। क्या हम आस्ट्रेलिया का अर्थ जानते हैं? अस्त्रालय का अर्थ है ‘अस्त्र रखने का भण्डारगृह’। अस्त्र का अर्थ होता है ‘हथियार’। रामायण काल के दौरान उन लोगों ने वहाँ अनेक प्रकार के अस्त्र रखे थे। वहाँ अस्त्र बनाए भी जाते थे। उन अस्त्रों के कारण वहाँ केंद्र में रेगिस्तान भी था, जिसके कारण वह स्थान निर्जन था। अब भी वह निर्जन ही है। हाँ!

योग वशिष्ठ के ज्ञान का महत्व

महर्षि वशिष्ठ द्वारा राम को ‘योग वशिष्ठ’ का ज्ञान दिया गया था। यह इस धरती पर अब तक किए गए सर्वाधिक अद्भुत कार्यों में से एक है! आप में से कितने लोगों ने इसे पढ़ा है? जिन्होंने भी अब तक नहीं पढ़ा है, उन्हें जरूर पढ़ना चाहिए। हो सकता है आपको ये समझ में न आए, पर आप इसे पढ़ें जरूर। यह वास्तव में बहुत सुंदर ज्ञान है। इसके कुछ भाग समझने के लिए कठिन हैं, तो उन्हें छोड़ कर आगे बढ़ जाएँ। 

योग वशिष्ठ उच्च प्रकृति के गणित की तरह है। यह ग्रन्थ इतना लोकप्रिय नहीं हुआ क्योंकि यह समझने में कुछ कठिन है और इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इसका कारण यह था कि ‘इसे केवल सुपात्र को ही प्रदान किया जाता था’। इसे पीएचडी की भांति रखा गया था। यह भी एक कारण है कि यह भगवद्गीता की भांति लोकप्रिय नहीं हो सका। यहाँ तक कि अष्टावक्र गीता को भी आम जनता ज्यादा नहीं जानती है। भगवद्गीता सरल एवं सुगम है।

आइए! सुदर्शन क्रिया सीखें और ज्ञान रूपी प्रकाश अपने अंदर जलाएँ – स्वास्थ्य, आनंद एवं समृद्धि पाएँ

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी के ज्ञान वार्ता से संकलित।

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राम नवमी पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राम नवमी भगवान विष्णु के सातवें अवतार, भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आती है। आध्यात्मिक दृष्टि से, यह दिन अधर्म पर धर्म की विजय और हमारे भीतर ‘राम तत्व’ (शांति और आनंद) को जगाने का प्रतीक है।
श्री राम को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं में रहकर धर्म, नैतिकता और कर्तव्यों का सर्वोच्च पालन किया। वे एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति और आदर्श राजा के रूप में जाने जाते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादा और सिद्धांतों से विचलित नहीं हुए।
आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार, उपवास शरीर को शुद्ध करता है और मन को अंतर्मुखी होने में मदद करता है। राम नवमी पर पूजा और ध्यान करने से मन में शांति आती है और व्यक्ति के भीतर धैर्य, साहस और करुणा जैसे गुण विकसित होते हैं, जो श्री राम के व्यक्तित्व का आधार थे।
‘राम’ शब्द दो धातुओं से बना है: ‘रा’ जिसका अर्थ है प्रकाश (Radiance) और ‘म’ जिसका अर्थ है मैं/स्वयं। अतः ‘राम’ का अर्थ है “मेरे भीतर का प्रकाश”। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर  बताते हैं , जब हमारा मन शांत और स्थिर होता है, तब हम अपने भीतर के वास्तविक राम तत्व का अनुभव करते हैं।
‘राम राज्य’ एक ऐसे समाज का प्रतीक है जहाँ न्याय, सुख और शांति हो। आज के समय में, राम राज्य का अर्थ है एक ऐसा शासन और समाज जहाँ मानवीय मूल्यों की प्रधानता हो। यह हमें भ्रष्टाचार मुक्त और सेवाभावी समाज बनाने की प्रेरणा देता है।
आर्ट ऑफ लिविंग के आश्रमों और केंद्रों में राम नवमी के अवसर पर विशेष सत्संग, रामायण पाठ, और ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं। यहाँ उत्सव का मुख्य उद्देश्य बाहरी पूजा के साथ-साथ भीतर की चेतना को शुद्ध करना और सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से विश्व शांति के लिए संकल्प लेना है।

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