बच्चों का लालन पालन

बच्चों का लालन-पालन एक पवित्र जिम्मेदारी है।

बच्चों के लालन-पालन के बारे में गुरुदेव बोलते हैं: "क्या आप जानते हैं कि एक घोड़े पर सवारी कैसे करते हैं? जब आप घोड़े पर बैठ जाते हैं, तो आपको उसके साथ ही हिलना पड़ता है। आपको घोड़े की गति की दिशा में अपने आप को भी आगे पीछे हिलाना पड़ता है, अन्यथा आपकी पीठ दुखने लगती है। माता पिता को बच्चों की गति की दिशा में चलना पड़ता है। उन्हें बच्चों के साथ साथ झूलना पड़ता है। बच्चों को जानिये और कोमलता से उनका मार्गदर्शन कीजिए। कभी कभी आप घोड़े की लगाम को कसते हैं और कभी ढीला छोड़ देते हैं। बच्चों के साथ भी ऐसा ही करना होता है। कभी कभी उन पर बंदिश लगाएँ और कभी उन्हें आजादी भी दें।"

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर की अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण वार्ताओं और काल निरपेक्ष ज्ञान पर आधारित ये लेख,वीडियो और कार्यक्रम बच्चों के लालन-पालन की एक जटिल लेकिन सुन्दर यात्रा में माता-पिता का मार्ग-दर्शन करते हैं, ताकि एक प्रसन्न, आत्मविश्वास से भरे हुए मजबूत एवं लचीले व्यक्तित्व के बच्चे को विकसित किया जा सके।

योग एवं ध्यान कार्यक्रम

बच्चों और माता-पिता के लिए

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सकारात्मक लालन-पालन के आधारभूत सिद्धांत क्या हैं?

अच्छे व्यवहार की प्रशंसा करें, स्पष्ट सीमाएँ निर्धारित करें और स्वयं सहानुभूति का आदर्श बनें। दण्ड देने की अपेक्षा जुड़ाव पर ध्यान दें।

मैं अपने बच्चे में आत्मसम्मान का निर्माण कैसे करूँ?

विशिष्ट रूप से प्रशंसा करें, बच्चे में स्वावलंबन को प्रोत्साहन दें, और उसकी भावनाओं का सम्मान करें। अत्यधिक आलोचना से बचें।

यदि मेरा बच्चा चिड़चिड़ापन दिखाए, तो मैं क्या करूँ?

शांत रहें, भावनाओं को स्वीकार करें और विषय से ध्यान हटाने या दूसरी जगह लगाने का प्रयास करें। जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाएँ, उन्हें परिस्थितियों का सामना करना सिखाएँ।

छोटे बच्चों के लिए कितना स्क्रीन टाइम उचित है?

2 वर्ष के कम आयु: बिल्कुल नहीं; 2 से 5 वर्ष: 1 घंटा, अपनी देख रेख में; बड़े बच्चों के लिए: अन्य खेलों के साथ संतुलित कर के। आप उनके साथ बैठकर देखें और जो कुछ वे देख रहे हैं, उस पर संवाद करें।

सहोदरों (भाई बहन) के बीच प्रतिस्पर्धा से कैसे निपटें?

किसी एक का पक्ष मत लीजिए; उन्हें चीजों को बाँटना और सहानुभूति सिखाएँ। प्रत्येक बच्चे के साथ सारणी बनाकर व्यक्तिगत समय व्यतीत करें।

लालन-पालन में दिनचर्या का क्या महत्व है?

स्थिर समय सारणी से सुरक्षा की भावना बढ़ती है और भावनात्मक संकटों में कमी आती है। इसमें भोजन, खेलने और सोने का समय भी सम्मिलित करें।

मैं लालन-पालन से होने वाले तनाव को कैसे कम करूँ?

स्वयं की उचित देखभाल पर ध्यान दें और बीच बीच में विश्राम लें। नियमित ध्यान करें।

किस आयु के बच्चों को घर पर अकेला छोड़ा जा सकता है?

यह उनकी परिपक्वता पर निर्भर करता है; सामान्यतः 10-12 वर्ष के बच्चों को थोड़े समय के लिए घर पर अकेला छोड़ सकते हैं। स्थानीय कानूनों तथा तैयारियों की भी समीक्षा करें।

खानपान की स्वस्थ आदतों को कैसे प्रोत्साहित करें?

बच्चों को खाना बनाने में सम्मिलित करें, बिना दबाव बनाए भोजन में विविधता प्रस्तुत करें और स्वयं संतुलित आहार लेकर आदर्श स्थापित करें।