कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्री गुरु नानक जी का जन्मदिन भी मनाया जाता है। गुरू नानक जी की जयंती या गुरुपूरब (गुरु पर्व), सिख समुदाय में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण दिवस है। गुरू नानक जी की जयंती पर गुरु नानक जी के जन्म को स्मरण करते हैं। इसे गुरुपूरब (गुरु पर्व) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘गुरुओं का उत्सव’। गुरु नानक जी निहित नैतिकता, कड़ी मेहनत और सच्चाई का संदेश देते हैं। यह दिन महान आस्था और सामूहिक भावना और प्रयास के साथ, पूरे विश्व में उत्साह के साथ मनाया जाता है। गुरु नानक जी का जीवन प्रेम, ज्ञान और वीरता से भरा था।

Guru Nanak

गुरु नानक देव जी के जन्मदिन पर गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी का संदेश

500 साल पहले भारत में गुरु नानक देव जी नामक एक महान संत हुए। गुरु नानक देव जी पंजाब के रहने वाले थे। गुरु नानक देव जी ने बगदाद तक आध्यात्मिकता, परमेश्वर के साथ एकता और भक्ति के महत्व को फैलाया था। आज, सिख समुदाय गुरु नानक देव जी का जन्मदिन मनाता है और सिख समुदाय के लिए यह एक महत्वपूर्ण दिन है। आज कार्तिक पूर्णिमा भी है और आज ही के दिन जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

सिख धर्म में दस गुरु हुए और गुरु नानक देव जी प्रथम गुरु थे (सिख धर्म के संस्थापक)। सिख परंपरा के सभी दस गुरुओं की कहानियां हर्ष और उत्थान से ओतप्रोत हैं – वह उनके त्याग को दर्शाती हैं। गुरुओं ने अच्छे, निर्दोष और धार्मिक लोगों की रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया था। गुरुओं ने लोगों को सरल शब्दों में ज्ञान दिया।

गुरु नानक देव जी का संदेश

गुरु नानक देव जी ने भक्ति के अमृत-भक्ति रस के बारे में बताया। गुरु नानक देव जी भक्ति योग में पूरी तरह से डूबे हुए एक भक्त थे, जबकि गुरु गोबिंद सिंह एक कर्म योगी थे।

जब लोग सांसारिक मामलों में उलझ जाते हैं, तब गुरु नानक देव जी ने उन्हें अपने भीतर की ओर जाने के लिए प्रेरित किया – यही उनका संदेश था। गुरु नानक देव जी ने कहा, “इतने भी सांसारिक मामलों में मत उलझ जाओ कि आप परमेश्वर के नाम को भूल जाओ।”

Guru Nanak Dev with his disciples

गुरु नानक देव जी की भक्ति के बारे में एक सुंदर कहानी

कई बार, गुरु नानक देव जी के पिता उन्हें बाजार में सब्जियाँ बेचने के लिए कहते थे। सब्जियाँ बेचते समय, जैसे ही वह गिनती शुरू करते थे, वह 13 नंबर पर रुक जाते थे, जिसका अर्थ “तुम्हारा” भी होता है। तेरा शब्द सुनकर, वह दैवीय विचारों में डूब जाते थे। इसलिए, काम करते समय भी, उनका मन काम में नहीं बल्कि सिर्फ परमात्मा पर लगता था। गुरु नानक देव जी हमेशा कहते थे “मैं तुम्हारा हूँ, मैं तुम्हारा हूँ, मैं तुम्हारा हूँ।”

गुरु नानक का जीवन प्रेम, ज्ञान और वीरता से भरा हुआ था।

जपजी साहिब – सिख धर्म की सबसे महत्वपूर्ण प्रार्थना – गुरु नानक देव जी द्वारा लिखी गई थी।

गुरु ग्रंथ साहिब में एक सुंदर प्रार्थना है, जो कुछ इस तरह है, “एक ओंकार (भगवान एक है), सतनाम (उसका नाम सत्य है), कर्ता-पुरख (वह निर्माता है), निर्भय (वह बिना डर के), निर्वार (वह किसी के समान नहीं है), अकाल-मूरत (वह कभी मरता नहीं), अजनुनी साईंहांग (वह जन्म और मृत्यु से परे है), गुरप्रसाद (वह सच्चे गुरु की दया से महसूस होता है), जप (उसका नाम दोहराएँ), आदम सच (वह सच है), जुगाड सच (वह कभी भी सच है), है भी सच (वह अब भी सच है), नानक होस भी सच (वह भविष्य में सच हो जाएगा)।”

पूरी दुनिया एक ओंकार (एक दिव्यता) से पैदा होती है। हमारे चारों तरफ सब कुछ एक अकेले ओंकार के स्पंदन से बना है और आप केवल गुरु की कृपा से ही ओम को जान सकते हैं। यह सर्वव्यापी है, लेकिन यह केवल गुरु के माध्यम से ही समझा जा सकता है।

ॐ एक चेतना की गहराई में मौजूद अनन्त ध्वनि है। यदि आप समुद्र में जाते हैं और लहरों को ध्यान से सुनते हैं, तो आपको एक ही आवाज सुनाई देगी – ॐ यदि आप पहाड़ की चोटी पर जाते हैं और बहने वाली हवा को सुनते हैं, तो आपको ओम ही सुनाई देगा। इस जन्म से पहले, हम सब ॐ में थे। इस जन्म के बाद, हम उस ॐ की ध्वनि में विलय करेंगे। सृजन की गहराई में, वह आवाज अभी भी प्रतिध्वनित है। इन सभी धर्मों जैसे, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म, हिंदू धर्म, ताओवाद, या शिंटोवाद में – ओंकार (ॐ जप) को बहुत महत्व दिया जाता है।

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गुरुदेव का कालातीत ज्ञान

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गुरु नानक देव के संदेश से प्रेरणा लीजिए

आज, गुरु नानक देव जी के जन्मदिन पर हमें अपने आपको याद दिलाना चाहिए कि हमें माया में उलझना नहीं चाहिए। आइए हम खुश रहें और दूसरों को खुश रखें, प्रार्थना करें, सेवा करें और धर्म की रक्षा के लिए कार्य करें।

गुरु नानक पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

गुरु नानक जयंती, जिसे ‘प्रकाश पर्व’ या ‘गुरुपर्व’ भी कहा जाता है, सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह दिन उनके शांति, प्रेम और मानवता के संदेश को याद करने का दिन है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु नानक जयंती हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा (Karthik Purnima) पर मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह आमतौर पर नवंबर के महीने में पड़ती है।
गुरु नानक देव जी ने ‘एक ओंकार’ (ईश्वर एक है) का संदेश दिया। उनकी तीन मुख्य शिक्षाएँ हैं:
1. नाम जपो: ईश्वर का निरंतर सिमरन करना।
2. किरत करो: ईमानदारी और सच्चाई से मेहनत करना।
3. वंड छको: अपनी कमाई को जरूरतमंदों के साथ साझा करना।
इस उत्सव की शुरुआत ‘अखंड पाठ’ (गुरु ग्रंथ साहिब का 48 घंटे का पाठ) से होती है। त्यौहार के दिन सुबह ‘नगर कीर्तन’ निकाला जाता है, गटका (युद्ध कला) का प्रदर्शन होता है और गुरुद्वारों में ‘लंगर'(सामुदायिक रसोई) का आयोजन किया जाता है, जहाँ बिना किसी भेदभाव के सभी को भोजन कराया जाता है।
‘एक ओंकार’ का अर्थ है कि परमात्मा एक है और वह पूरी सृष्टि के कण-कण में समाया हुआ है। उन्होंने सिखाया कि ईश्वर तक पहुँचने के लिए किसी कर्मकांड की नहीं, बल्कि शुद्ध हृदय और निस्वार्थ सेवा की आवश्यकता है।
आर्ट ऑफ लिविंग और श्री श्री रवि शंकर जी के अनुसार, गुरु नानक देव जी का जीवन अध्यात्म और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम है। उनके भजन और शिक्षाएँ ध्यान और चेतना के उत्थान में सहायक हैं। गुरु नानक जी का मार्ग ‘सहज योग’ का मार्ग है, जो गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा देता है।
गुरु नानक देव जी ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, जातिवाद और भेदभाव को मिटाने के लिए ‘लंगर’ की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सभी मनुष्यों को एक साथ बैठकर भोजन कराकर समानता और भाईचारे का संदेश देना था।
एक ओंकार सतनाम, करता पुरख, निरभउ, निरवैर, अकाल मूरत, अजूनी, सैभंग, गुरप्रसाद। जप, आदि सच, जुगाद सच, है भी सच, नानक होसी भी सच।
एक ओंकार (भगवान एक है), सतनाम (उसका नाम सत्य है), कर्ता-पुरख (वह निर्माता है), निर्भय (वह बिना डर के), निर्वार (वह किसी के समान नहीं है), अकाल-मूरत (वह कभी मरता नहीं), अजनुनी सैभंग (वह जन्म और मृत्यु से परे है), गुरप्रसाद (वह सच्चे गुरु की दया से महसूस होता है), जप (उसका नाम दोहराएँ), आदि सच (वह सच है), जुगाद सच (वह कभी भी सच है), है भी सच (वह अब भी सच है), नानक होसी भी सच (वह भविष्य में सच हो जाएगा)। 
पूरी दुनिया एक ओंकार (एक दिव्यता) से पैदा होती है। हमारे चारों ओर सब कुछ एक अकेले ओंकार के स्पंदन से बना है और आप केवल गुरु की कृपा से ही ॐ को जान सकते हैं। यह सर्वव्यापी है, लेकिन यह केवल गुरु के माध्यम से ही समझा जा सकता है।
ॐ चेतना की गहराई में उपस्थित अनन्त ध्वनि है। यदि आप समुद्र में जाते हैं और लहरों को ध्यान से सुनते हैं, तो आपको एक ही आवाज सुनाई देगी – ॐ। यदि आप पहाड़ की चोटी पर जाते हैं और बहने वाली हवा को सुनते हैं, तो आपको ॐ ही सुनाई देगा। इस जन्म से पहले, हम सब ॐ में थे। इस जन्म के बाद, हम उस ॐ की ध्वनि में विलय करेंगे। सृजन की गहराई में, वह आवाज अभी भी प्रतिध्वनित है। इन सभी धर्मों जैसे, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म, हिंदू धर्म, ताओवाद, या शिंटोवाद में – ओंकार (ॐ जप) को बहुत महत्व दिया जाता है।

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