कपालभाति प्राणायाम | Kapalbhati Pranayama in Hindi

कपालभाति प्राणायाम का महत्व | Importance of Kapalbhati Pranayama

कपालभाति प्राणायाम करने की विधि । How To Do Kapalbhati Pranayama

कपालभाति प्राणायाम वीडियो| Kapalbhati Pranayama video

४ नुस्खें जो आप कपालभाति प्राणायाम करते समय उपयोग कर सकते है

कपालभाति प्राणायाम के ८ लाभ | 8 Benefits of Kapalbhati Pranayama in Hindi

कपालभाति प्राणायाम करते समय क्या नही करना चाहिए?

    कपाल=मस्तक (सिर); भाती= चमकने वाला; प्राणायाम = साँस लेने की प्रक्रिया

    यह एक शक्ति से परिपूर्ण (श्वाँस के द्वारा किये जाने वाला) प्राणायाम है, जो आपका वज़न कम करने में मदद करता है और आपके पूरे शरीर को संतुलित कर देता है।

    कपालभाति प्राणायाम का महत्व | Importance of Kapalbhati Pranayama

    जब आप कपालभाति प्राणायाम करते हैं तो आपके शरीर से ८०% विषैले तत्त्व बाहर जाती साँस के साथ निकल जाते हैं। कपालभाति प्राणायाम के निरंतर अभ्यास से शरीर के सभी अंग विषैले तत्व से मुक्त हो जाते हैं। किसी भी तंदुरस्त व्यक्ति को उसके चमकते हुए माथे (मस्तक या सिर) से पहचाना जा सकता है। कपालभाति प्राणायाम की उचित व्याख्या है, "चमकने वाला मस्तक”। मस्तक पर तेज या चमक प्राप्त करना तभी संभव है जब आप प्रतिदिन इस प्राणायाम का अभ्यास करें। इसका तात्पर्य यह है कि आपका माथा सिर्फ बाहर से नही चमकता परंतु यह प्राणायाम आपकी बुद्धि को भी स्वच्छ व तीक्ष्ण बनाता है।

    डॉक्टर सेजल शाह , आर्ट ऑफ़ लिविंग योग प्रशिक्षक, कपालभाति प्राणायाम का महत्व बताते हुए कहती है ।

    अधिक पढिये: प्राणायाम क्या है? | What is Pranayama in Hindi

    कपालभाति प्राणायाम करने की विधि । How To Do Kapalbhati Pranayama

    • अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए, आराम से बैठ जाएँ। अपने हाथों को आकाश की तरफ, आराम से घुटनों पर रखें।
    • एक लंबी गहरी साँस अंदर लें।
    • साँस छोड़ते हुए अपने पेट को अंदर की ओर खींचे। अपने पेट को इस प्रकार से अंदर खींचे की वह रीढ़ की हड्डी को छू ले। जितना हो सके उतना ही करें। पेट की मासपेशियों के सिकुड़ने को आप अपने पेट पर हाथ रख कर महसूस कर सकते हैं। नाभि को अंदर की ओर खींचे।
    • जैसे ही आप पेट की मासपेशियों को ढीला छोड़ते हो, साँस अपने आप ही आपके फेफड़ों में पहुँच जाती है।
    • कपालभाति प्राणायाम के एक क्रम (राउंड) को पूरा करने के लिए २० साँस छोड़े।
    • एक राउंड खत्म होने के पश्चात, विश्राम करें और अपनी आँखों को बंद कर लें। अपने शरीर में प्राणायाम से प्रकट हुई उत्तेजना को महसूस करें।
    • कपालभाति प्राणायाम के दो और क्रम (राउंड) को पूरा करें।

    अधिक पढिये: नाड़ी शोधन प्राणायाम | अनुलोम विलोम प्राणायाम

    कपालभाति प्राणायाम वीडियो| Kapalbhati Pranayama video

    ४ नुस्खें जो आप कपालभाति प्राणायाम करते समय उपयोग कर सकते है

    • कपालभाति प्राणायाम करते समय, ज़ोर से साँस को बाहर छोड़ें। ताकत के साथ साँस को बाहर की और फेंके।
    • साँस लेने के लिए अधिक चिंता न करें। आप जैसे ही अपने पेट की मासपेशियों को ढीला छोड़ते है, आप अपने आप ही साँस लेने लग जाते है।
    • अपना ध्यान बाहर जाती हुई साँस पर रखें।
    • इस प्राणायाम की प्रक्रिया को किसी भी ऑफ़ लिविंग योग प्रशिक्षक से सीखें और फिर अपने घर पर इसका अभ्यास खाली पेट पर करें।

    अधिक पढिये: अपनी साँस द्वारा गहरे विश्राम का अनुभव करें

    कपालभाति प्राणायाम के ८ लाभ | 8 Benefits of Kapalbhati Pranayama in Hindi

    • यह चयापचय प्रक्रिया को बढ़ाता है और वज़न कम करने में मदद करता है।
    • नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है
    • पेट की मासपेशियों को सक्रिय करता है जो कि मधुमेह के रोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है।
    • [रक्त परिसंचरण को ठीक करता है] और चेहरे पर चमक बढ़ाता है।
    • पाचन क्रिया को अच्छा करता है और पोषक तत्वों का शरीर में संचरण करता है।
    • आपकी पेट कि चर्भी फलस्वरूप अपने-आप काम हो जाती है।
    • मस्तिष्क और तांत्रिक तंत्र को ऊर्जान्वित करता है ।
    • मन को शांत करता है।

    अधिक पढिये: भ्रामरी प्राणायाम करने की प्रक्रिया और लाभ

    कपालभाति प्राणायाम करते समय क्या नही करना चाहिए?

    • यदि आप हर्निया, मिर्गी, स्लिप डिस्क, कमर दर्द, अथवा स्टेंट के मरीज़ हैं तो यह प्राणायाम न करें। यदि आपकी कुछ समय पूर्व पेट की सर्जरी हुई है तब भी यह प्राणायाम न करें।
    • महिलाओं को यह प्राणायाम गर्भावस्था के दौरान अथवा उसके तुरंत बाद नही करना चाहिए। मासिक धर्म के दौरान भी यह प्राणायाम नही करना चाहिए।
    • हाइपरटेंशन के मरीजों को यह प्राणायाम किसी योग प्रशिक्षण के नेतृत्व में ही करना चाहिए।

    अधिक पढिये: साँस के द्वारा मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के उपाय

    योग शरीर व मन का विकास करता है। इसके अनेक शारीरिक और मानसिक लाभ हैं परंतु इसका उपयोग किसी दवा आदि की जगह नही किया जा सकता यह आवश्यक है की आप यह योगासन किसी प्रशिक्षित श्री श्री योग (Sri Sri Yoga) प्रशिक्षक के निर्देशानुसार ही सीखें और करें। यदि आपको कोई शारीरिक दुविधा है तो योगासन करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी भी श्री श्री योग प्रशिक्षक से अवश्य संपर्क करें। श्री श्री योग कोर्स करने के लिए अपने नज़दीकी आर्ट ऑफ़ लिविंग सेन्टर पर जाएं। किसी भी आर्ट ऑफ़ लिविंग कोर्सके बारे में जानकारी लेने के लिए हमें info@artoflivingyoga.org पर संपर्क करें।