मुँह के छाले मुँह में असहनीय दर्द पैदा करते हैं और अक्सर कई दिनों तक इसका पता नहीं चलता। यह होठों, जीभ, गालों के भीतरी भाग, मसूड़ों या मुँह की छत पर घाव के रूप में प्रकट हो सकता है। यद्यपि यह कोई बीमारी नहीं है, लेकिन इसका मूल कारण कई चिंताओं का संकेत हो सकता है।

मुँह के छालों के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो सकते हैं। अप्रत्यक्ष कारण आपको किसी अंतर्निहित बीमारी के प्रति सचेत करते हैं।
सुदर्शन क्रिया सीखें
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शीतली प्राणायाम
मुँह के छालों का एक कारण शरीर के अंदर की गर्मी है, इसलिए शीतली प्राणायाम शरीर के तापमान को ठंडा कर बहुत मदद करता है और पाचन में भी सुधार करता है। शीतली प्राणायाम करने के चरण इस प्रकार हैं:
- किसी समतल सतह पर पर आराम से बैठें।
- अपनी हथेलियों को घुटनों पर रखें।
- आराम करें और अपनी जीभ को ट्यूब की तरह घुमाएँ।
- जीभ से साँस अंदर लें और फिर अपना मुँह बंद कर लें।
- धीरे-धीरे नाक से साँस छोड़ें और तापमान में बदलाव महसूस करें।
- प्रक्रिया को दोहराएँ।
शीतकारी प्राणायाम
यह प्राणायाम मन और शरीर को शांत करता है, शरीर में अग्नि तत्व (पित्त) को संतुलित करता है और पूरे शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करता है। शीतकारी प्राणायाम करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:
- किसी समतल सतह पर आराम से बैठें।
- अपनी हथेलियों को घुटनों पर रखें।
- आराम करें, अपनी आँखें बंद करें और अपनी जीभ को अपने तालू (मुँह की छत) से स्पर्श करें।
- दाँतों को आपस में भींच लें और अपना मुँह खुला रखें।
- अब मुँह से धीरे-धीरे साँस अंदर लें और फुफकारने जैसी आवाज करें।
- अपनी साँस को यथासंभव लंबे समय तक रोके रखें।
- अपनी गर्दन को नीचे की ओर झुकाएँ और नाक से साँस छोड़ें।
- प्रक्रिया को दोहराएँ।

सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार सबसे अधिक प्रचलित योगासन है जिसमें कई आसनों का संयोजन है। चूंकि मुँह के छाले विटामिन की कमी के कारण हो सकते हैं, इसलिए नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने से प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ती है और मुँह के छालों से बचाव होता है। यह कई समस्याओं का एकमात्र समाधान है, जैसे पीठ दर्द, कम चयापचय, तनाव और चिंता, त्वचा संबंधी समस्याएँ, मासिक धर्म संबंधी समस्याएँ आदि।

सेतु बंधासन
सेतु बंधासन एक योगासन है जो वायरल संक्रमण से लड़ने में मदद करता है और मुँह के छालों को रोकता है। यह आसन छाती और फेफड़ों को खोलता है और मन को शांत करता है। यह रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाने तथा तनाव, चिंता और अवसाद को दूर करने में मदद करता है।
निष्कर्ष
आप इन परीक्षित घरेलू उपचारों से भी मुँह के छालों को प्राकृतिक रूप से शीघ्रता से ठीक कर सकते हैं:
- शहद
- नारियल तेल
- एलोवेरा जेल
- सिरका
- तुलसी तेल
- हल्दी का पेस्ट
इनके अलावा, हाइड्रेटेड और खुश रहना, मौखिक स्वच्छता सुनिश्चित करना और मसालेदार और जंक फूड से बचना याद रखें। ध्यान और सुदर्शन क्रिया से अपना भावनात्मक संतुलन और शांति बनाए रखें।
समस्याओं का सामना करने के लिए खुद को तैयार करने का पहला कदम – शांति है। जब आपको शांति और आंतरिक शक्ति मिल जाती है, तब आप किसी भी समस्या का सामना कर सकते हैं। वह समस्या तो समस्या जैसी भी नहीं लगेगी।













