भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika Pranayama in Hindi)

जब भी हम कोई शारीरिक व्यायाम करते हैं, तो हमारा शरीर अधिक ऑक्सीजन की माँग करता है और उसके लिए यह हृदय को तीव्रता से रक्त संचार करने के लिए संकेत भेजता है। उसके परिणामस्वरूप हमारी हृदय की धड़कन बढ़ जाती है। परंतु क्या आप जानते हैं कि जब हम भस्त्रिका प्राणायाम करते हैं, तो शारीरिक माँग के बिना भी हम और अधिक मात्रा में ऑक्सीजन पम्प करते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें हम तेजी से साँस अंदर लेते हैं और तेजी से ही बाहर छोड़ते हैं, जिससे शरीर में तुरंत ऊर्जा का संचार होने लगता है; इसलिए इस प्राणायाम को “योगिक अग्नि श्वास” भी कहा गया है। अतः अगली बार जब आपको लगे कि आपके शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता है, तो आप भस्त्रिका प्राणायाम कर सकते हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम की प्रक्रिया (Bhastrika Pranayama Steps in Hindi)

  1. वज्रासन अथवा सुखासन में बैठ जाएँ।
  2. (यदि आप वज्रासन में बैठ सकते हैं, तो यह प्राणायाम अधिक प्रभावी रहेगा, क्योंकि आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहेगी और डायाफ्राम की गतिविधि सुचारू ढंग से होगी। )
  3. अपने हाथों की मुट्ठियाँ बंद कर के, कोहनियों को मोड़ कर कंधों के पास रख लें।
  4. गहरी साँस लेते हुए हाथों को ऊपर ले जाएँ और मुट्ठियाँ खोल दें।
  5. अब थोड़ा बलपूर्वक साँस छोड़ते हुए, अपनी भुजाओं को नीचे कंधों तक लाएँ और मुट्ठियाँ पुनः बंद कर लें।
  6. इस प्रकार 20 साँसे लें।
  7. तत्पश्चात् हथेलियाँ आकाश की ओर खुली, जंघाओं पर रख कर विश्राम करें।
  8. कुछ सामान्य साँसे लें।
  9. इस प्रक्रिया के दो और चक्र करें।

भस्त्रिका प्राणायाम वीडियो

भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ (Bhastrika Pranayama ke fayde)

  • यह शरीर तथा मन को ऊर्जावान करने के लिए उत्तम है।
  • चूँकि इस प्राणायाम को करते समय हम अपने फेफड़ों की पूरी क्षमता का उपयोग कर रहे होते हैं, इसलिए यह फेफड़ों और शरीर से विषैले तत्वों तथा अशुद्धियों को बाहर निकालने में सहायक है।
  • यह साइनस, ब्रोंकाइटिस तथा कुछ अन्य साँस संबंधी समस्याओं के निदान में भी सहायता करता है।
  • इससे सजगता तथा इंद्रियों की ग्रहण क्षमता में सुधार होता है। 
  • दोषों और विकृतियों को संतुलित करने में सहायक है।

निषेध

  • सुनिश्चित करें कि यह प्राणायाम करते समय आपका पेट खाली है।
  • गर्भवती महिलाओं को यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • इसे अपनी गति और क्षमता के अनुसार ही करें। यदि आपको अशांत या चक्कर जैसा लगे, तो चक्रों के बीच विराम की अवधि बढ़ा सकते हैं।
  • यदि आपको उच्च रक्तचाप अथवा घबराहट की समस्या है, तो यह प्राणायाम किसी प्रशिक्षक की निगरानी में ही करें।
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भस्त्रिका प्राणायाम के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

भस्त्रिका प्राणायाम एक श्वास प्रक्रिया है, जिसमें हम तेजी से साँस अंदर लेते हैं और तेजी से ही बाहर छोड़ते हैं, जिससे शरीर में तुरंत ऊर्जा का संचार होने लगता है; इसलिए इस प्राणायाम को “योगिक अग्नि श्वास” भी कहा गया है। 
1. यह शरीर तथा मन को ऊर्जावान करने के लिए उत्तम है।
2. चूँकि इस प्राणायाम को करते समय हम अपने फेफड़ों की पूरी क्षमता का उपयोग कर रहे होते हैं, इसलिए यह फेफड़ों और शरीर से विषैले तत्वों तथा अशुद्धियों को बाहर निकालने में सहायक है।
3. यह साइनस, ब्रोंकाइटिस तथा कुछ अन्य साँस संबंधी समस्याओं के निदान में भी सहायता करता है।
4. इससे सजगता तथा इंद्रियों की ग्रहण क्षमता में सुधार होता है। 
5. दोषों और विकृतियों को संतुलित करने में सहायक है।
1. वज्रासन अथवा सुखासन में बैठ जाएँ।
2. यदि आप वज्रासन में बैठ सकते हैं, तो यह प्राणायाम अधिक प्रभावी रहेगा, क्योंकि आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहेगी और डायाफ्राम की गतिविधि सुचारू ढंग से होगी। 
3. अपने हाथों की मुट्ठियाँ बंद कर के, कोहनियों को मोड़ कर कंधों के पास रख लें।
4. गहरी साँस लेते हुए हाथों को ऊपर ले जाएँ और मुट्ठियाँ खोल दें।
5. अब थोड़ा बलपूर्वक साँस छोड़ते हुए, अपनी भुजाओं को नीचे कंधों तक लाएँ और मुट्ठियाँ पुनः बंद कर लें।
6. इस प्रकार 20 साँसे लें।
7. तत्पश्चात् हथेलियाँ आकाश की ओर खुली, जंघाओं पर रखकर विश्राम करें।
8. कुछ सामान्य साँसे लें।
9. इस प्रक्रिया के दो और चक्र करें।
1. सुनिश्चित करें कि यह प्राणायाम करते समय आपका पेट खाली है।
2. गर्भवती महिलाओं को यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
3. इसे अपनी गति और क्षमता के अनुसार ही करें। यदि आपको अशांत लगे या चक्कर आए, तो चक्रों के बीच विराम की अवधि बढ़ा सकते हैं।
4. यदि आपको उच्च रक्तचाप अथवा घबराहट की समस्या है, तो यह प्राणायाम किसी प्रशिक्षक की निगरानी में ही करें।
हाँ, भस्त्रिका प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता को अधिकतम करता है। तीव्र गति से श्वास लेने और छोड़ने से फेफड़ों की पूरी क्षमता का उपयोग होता है, जिससे वे मजबूत होते हैं और विषैले तत्वों को प्रभावी ढंग से बाहर निकालते हैं।
चूंकि यह एक ऊर्जा बढ़ाने वाला प्राणायाम है, इसलिए इसे सुबह के समय करना सबसे अच्छा होता है। इसे हमेशा खाली पेट करना चाहिए, खासकर भोजन के 3 घंटे बाद।

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