लहसुन प्याज की जाति की वनस्पति है। इस वनस्पति में एक तीव्र गंध होती है जिसके कारन इसे एक औषधि का दर्जा दिया गया है। दुनियाभर में लहसुन का उपयोग मसाले, चटनी, सॉस, अचार तथा दवाओ के तौर पर किया जाता है। लहसुन का उष्मांक मूल्य 145 है।

वैज्ञानिक नाम: अलीयम सॅटीवेम (Allium sativem)

संस्कृत नाम : लशुन

अंग्रेजी नाम: Garlic

100 ग्राम अच्छे लहसुन में निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं:

पानी – 62%
प्रोटीन्स – 6.3%
श्वेतसार – 29.8%
खनिज – 02%
रेशे – 0.8%
वसा – 0.2%
कैल्शियम – 30 मि.ग्राम
फॉस्फोरस – 329 मि.ग्राम
लोह – 2.3 मि. ग्राम
विटामिन – 23 मिली ग्राम
विटामिन बी काम्प्लेक्स – अल्प मात्रा

लहसुन के औषधीय गुण

  • सल्फर पदार्थ के होने के कारण लहसुन में एक तीव्र गंध आती है जिसके कारण इसमें रोगाणु रोधक विशेषताएँ भी होती है।
  • लहसुन के तेल में गंध ज्यादा मात्रा में पाया जाता है इस, लिए इसमें औषधीय तत्व होते हैं।
  • लहसुन पुष्टि कर, वीर्यवर्धक, गर्म, पाचक, रेचक है।
  • लहसुन मेधा शक्ति वर्धक है।

लहसुन के लाभ

1. सांस के विकार, अस्थमा

लहसुन अस्थमा के रोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक साबित हो सकता है। सांस आसानी से चले, इसलिये लहसुन की एक पंखुडी गर्म करके नमक के साथ खाये। अस्थमा कम होने लिये एक प्याली गर्म पानी में दो चम्मच शहद और 10 बूँद लहसुन का रस लीजिये। सोने से पूर्व लहसुन की 3 कलियाँ दूध में उबालकर लेने से रात में दमा की तकलीफ काफी हद तक कम हो सकती है। अस्थमा से आराम पाने के लिये एक लहसुन बारीक पीस कर 120 मिली माल्ट विनेगर में डाल कर उबाल लीजिये। ठंडा होने के बाद छानकर, उतनी ही मात्रा में शहद मिलाकर तैयार करें। यह रसायन 2 चम्मच मेथी के अर्क के साथ सोने से पूर्व लें। न्युमोनिया में आराम पाने के लिये एक लिटर पानी में एक ग्राम लहसुन और 250 मिली दूध डालकर उबालें। एक चौथाई होने तक उबालते रहें। यह दूध दिन में तीन बार लें। क्षय रोग में आराम पाने के लिये लहसुन दूध में उबाल कर लेना चाहिये, ऐसा आयुर्वेद में बताया गया है। साथ ही अस्थमा के लिए योग करें।

2. पाचन विकार

लहसुन शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। पाचन रस का स्राव अच्छा करता है जिससे आंतो की सर्पिल हलचल में गती मिलती है। किसी भी पाचन विकार में लहसुन का दूध या पानी के साथ अर्क लिया जा सकता है। आँतों के जीवाणु संक्रमण में लहसुन के इस्तेमाल से फायदा मिलता है। यह कृमी नाशक भी है और हर रोज लहसुन के दो गांठे खाने से अत्यंत लाभ प्राप्त होता है। कोलायटीस, पेचीश में लहसुन की एक कॅप्सूल काफी है। पेट की सभी रोगों से रहत पाने के लिए लहसुन एक हिस्सा, सैन्धा नमक और घी में भुना हुआ हिंग एक चौथाई हिस्सा, अद्रक के रस के साथ लेने से बहुत लाभ मिलता है।

3. उच्च रक्त चाप

लहसुन के उचित उपयोग से रक्त वाहिका के उपर आनेवाला दबाव और तनाव काम हो जाता है। नाड़ी और हृदय के कंपन की गति कम होती है। उच्च रक्त चाप के उपचार के लिए लहसुन तेल की छह बूँदें , चार चम्मच पानी के साथ दो बार लें। बढ़ा हुआ रक्त चाप कम करने के लिये लहसुन, पुदिना, जीरा, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक से बनी हुई चटनी का सेवन करना चाहिये। साथ ही उच्च रक्त चाप के लिए योग करें।

4. हृदय रोग

लहसुन के नियमित सेवन से रक्त वाहिका में जमा हुआ कोलॅस्टेरोल (Cholesterol) आसानी से निकलने में मदद होती है और दिल का दौरा आने की संभावना कम होती है।

यदि किसी को दिल का दौरा आने की सम्भावना है तो उसे प्रतदिन 5-6 कलियाँ अवश्य लेनी चाहिए। दूध से साथ लहसुन लेना भी सेहत के लिए काफी लाभदायक है।

साथ ही हृदय रोग के लिए योग करें।

5. कैंसर

कैंसर में लहसुन का नियमित सेवन जारी रखने से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढती है तथा कैंसर की कोशिकाओं की बढत 139% से कम हो जाती है।

6. त्वचा विकार

कील और मुहासे कम होने के लिये चेहरे पर नियमित लहसुन लगाना चाहिए। त्वचा पर जहाँ दाद का प्रकोप हुआ है वहाँ लहसुन रगड़ने से वह खराब त्वचा जलकर ठीक हो जाती है। लहसुन रक्त को शुद्ध करता है तथा रक्त से विषैले तत्व को दूर करता है। जख्म और दाग दूर करने के लिये जिवाणुहीन साफ पानी में लहसुन रस 3:1 इस मात्रा में मिलाकर लगायें।

काली खाँसी , रक्त दोष, गलझिल्ली, बहरापन, कुष्ठ रोग, गठीया, बवासीर, यकृत और पित्ताशय के विकार आदि रोगो के लिए भी लहसुन बहुत लाभदायक है। कामेच्छा कम होना, संभोग शक्ती कमजोर होने से लहसुन का उपयोग किया जा सकता है।

लहसुन की झाड़ी 2-3 फ़ीट ऊँची होती है। इसके जड़ के कंद में 5 से 35 लहसुन की कलियाँ पायी जाती हैं। एक खास तरह के लहसुन की कंद में एक ही लहसुन आता है जिसके ऊपर सफेद और पारदर्शक झिल्ली होती है।

साथ ही त्वचा में निखार के लिए योग करें।

लहसुन के दो प्रकार 

  • कश्मीरी लहसुन: यह लहसुन हिमालय की ऊँची पहाड़ियों पर उगाया जाता है। क्योंकि यह लहसुन शुद्ध वातावरण में उगाया जाता है इसमें औषधीय तत्त्व प्रचुर मात्रा में होते है।
  • सामान्य लहसुन: इसकी जड़ में 5 से 35 पंखुड़ियाँ होती है। एक लहसुन की कंद में सिर्फ एक ही लहसुन पाया जाता है।

जमीन

लहसुन की जुताई के लिये जमीन उपजाऊ, भुरभुरी और पानी को ना रोकनेवाली होनी चाहिये। जिससे लहसुन  अच्छी तरह बड़ा हो और उसे आसानी से निकाला जा सके।

मौसम

खूब गर्म या खूब ठंडे मौसम में लहसुन की पैदावार प्रभावित होती है। इसकी उपज के लिये ज्यादा पानी की जरुरत पड़ती है। अगर पानी की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में हो तो यह फसल साल भर ले सकते हैं । लहसुन शीत और सूखे  मौसम में अच्छी तरह उपजता है।

सावधानी

  • लहसुन गर्म और तेज गुणो वाला वनस्पति है। पित्त प्रकृति के लोगों को इसे वैद्य की सलाह से ही लेना चाहिए।
  • गर्भावस्था में लहसुन न खाएं।
  • पित्त विकार में शक्कर के साथ, कफ विकार में शहद के साथ और वात विकार में घी के साथ ही लहसुन का सेवन करे।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

आयुर्वेद में लहसुन को ‘रसोन’ कहा गया है, जिसमें पाँच रस (मधुर, लवण, कटु, तिक्त और कषाय) होते हैं। यह स्वभाव में गर्म (उष्ण वीर्य) होता है और मुख्य रूप से शरीर में वात और कफ दोष को संतुलित करने के लिए जाना जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
हाँ, सुबह खाली पेट कच्चे लहसुन की एक या दो कलियाँ पानी के साथ निगलने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सुधरता है और प्राकृतिक रूप से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और वजन घटाने में भी सहायक हो सकता है।
लहसुन में ‘एलिसिन’ नामक एक सक्रिय तत्व होता है, जो धमनियों को आराम देता है और रक्त के थक्के जमने से रोकता है। नियमित रूप से लहसुन का सेवन करने से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर कम होता है और उच्च रक्तचाप (Hypertension) को प्रबंधित करने में मदद मिलती है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है।
लहसुन की तासीर बेहद गर्म होती है। इसलिए, जिन लोगों का पित्त बढ़ा हुआ है, जिन्हें एसिडिटी, सीने में जलन या अल्सर की समस्या है, उन्हें लहसुन का सेवन सीमित मात्रा में या चिकित्सक की सलाह पर ही करना चाहिए। साथ ही, गर्भवती महिलाओं और सर्जरी कराने जा रहे व्यक्तियों को इसका अधिक सेवन करने से बचना चाहिए।
लहसुन एक शक्तिशाली खाद्य पदार्थ है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें उपस्थित सल्फर यौगिक संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। सर्दी-खाँसी या श्वसन संबंधी समस्याओं में लहसुन को शहद के साथ लेने या इसे भूनकर खाने से कफ कम होता है और तुरंत राहत मिलती है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से कच्चा लहसुन अधिक प्रभावी माना जाता है क्योंकि पकाने पर इसमें उपस्थित ‘एलिसिन’ नामक तत्व कम हो जाता है। यदि आप कच्चा लहसुन नहीं चबा सकते, तो इसे बारीक काटकर 5-10 मिनट हवा में छोड़ दें और फिर पानी के साथ निगल लें।
हाँ, लहसुन के सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) गुण जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में वात रोगों (जैसे गठिया) के उपचार के लिए लहसुन के दूध या लहसुन के तेल से मालिश की सलाह दी जाती है।

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