ब्रह्म मुहूर्त क्या है?

हर दिन सुबह 4:30 बजे मेरे दादाजी अपने पसंदीदा देवताओं को जगाने में व्यस्त रहते हैं। उसके बाद वे ध्यान करते हैं और फिर एक लंबी सैर के लिए जाते हैं। “आह, क्या सुंदर सुबह है,” वह घर लौटने के बाद हर रोज कहते हैं।

ब्रह्म का अर्थ है ‘ज्ञान’ और मुहूर्त का अर्थ है ‘समय-अवधि’। ब्रह्म मुहूर्त, ज्ञान को समझने के लिए सबसे सही समय है। ब्रह्म मुहूर्त का समय लगभग सुबह 3:30 बजे से सुबह 5:30 बजे के बीच होता है।

1 मुहूर्त = 48 मिनट। ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से ठीक 2 मुहूर्त पहले शुरू होता है। इसलिए, यह सूर्योदय से 1 घंटा और 36 मिनट पहले शुरू होता है और इससे 48 मिनट पहले समाप्त होता है। जैसा कि हम जानते हैं कि सूर्योदय का समय मौसम और भौगोलिक स्थानों के अनुसार अलग-अलग होता है, इसलिए ब्रह्म मुहूर्त भी उसी के अनुसार बदलता रहता है।

मेरे दादाजी का हमेशा प्रातःकाल में, विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में, जो सूर्योदय से डेढ़ घंटे पहले होता है, के साथ अंतरंग संबंध है। इतना अधिक है कि आप उन्हें सर्दियों की ठंड के बावजूद अपनी सुबह की दिनचर्या को निभाते पाएँगे। उनका मानना है कि उनके संस्कार ने उन्हें अच्छे स्वास्थ्य में रखा है। 80 साल से ऊपर होने के बावजूद, वे सीधा चलते हैं और उन्हें कोई बीमारी नहीं है।

चिकित्सा विशेषज्ञ भी उनसे सहमत हैं। ‘अष्टांग हृदय’, आयुर्वेद पर एक ग्रंथ में भी लिखा हुआ है कि ब्रह्म मुहूर्त में जागने से किसी की भी उम्र बढ़ जाती है और बीमारियों से बचने में मदद मिलती है।

ब्रह्म मुहूर्त: आपका ‘अपना’ समय

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रोगमुक्त शरीर और जीवनकाल में वृद्धि के लाभ आकर्षक हैं। हालाँकि शुरुआती दिनों में मेरे दादाजी का प्यार कुछ ज्यादा ही गहरा था। उनके अपने शब्दों में, यह उनका ‘अपना समय’ है। उन्होंने मुझे समझाया। उन्होंने कहा कि सुबह से रात तक, हम दुनिया की मांगों का आदर कर रहे हैं। दिन व्यवसायी, सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में व्यतीत होता है। रात में स्वयं के लिए थोड़ा समय बचा है। लेकिन उस अवधि में, आपकी ऊर्जा बहुत कम हो जाती है। एक ही समय जब आप तरोताजा होते हैं, जागरूक होते हैं और आसानी से अपने भीतर जा सकते हैं, वह है ब्रह्म मुहूर्त, यह आपके लिए एक ‘विशेष’ समय है।

ब्रह्म मुहूर्त में जागने के शोध लाभ 

इंटरनेशनल जूर्नल ऑफ योगा एंड एलाइड साइंसेज के अनुसार, पूर्व-भोर अवधि के दौरान, वातावरण में नवजात ऑक्सीजन की उपलब्धता होती है। यह नवजात ऑक्सीजन आसानी से हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है, जिसके निम्नलिखित लाभ हैं:

  • प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत होती है।
  • ऊर्जा स्तर बढ़ता है।
  • रक्त पी-एच में संतुलन बना रहता है।
  • दर्द, खराश और ऐंठन से राहत होती है।
  • खनिज और विटामिन में अवशोषण बढ़ता है।

इस ‘अपने समय’ में करें यह 5 चीजें

हमारे पूर्वजों को लगा कि ब्रह्म मुहूर्त में की गई कुछ गतिविधियाँ स्वयं को संतुलित करने में मदद कर सकती हैं। यह गतिविधियाँ व्यक्तिगत और सांसारिक दोनों ही क्षेत्रों में इस समय को अपने लिए विशेष और फलदायी बनाने में मदद करती हैं। धर्मशास्त्र, हिंदू धर्मग्रंथ और ‘अष्टांग हृदय’ जैसे प्राचीन ग्रंथ निम्नलिखित सलाह देते हैं:

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर सलाह देते हैं कि आपको हर सुबह सबसे पहले क्या करना चाहिए।

जब आप सुबह उठें, तो उन महान लोगों को याद करें जिनकी चेतना महान रही है। यह आपको सकारात्मकता के साथ अपना दिन शुरू करने में मदद करेगा। आपका मन में उत्साह होगा।

1. ध्यान करें

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ध्यान स्वयं से मिलने का सबसे अच्छा तरीका है। और जब बाकी दुनिया सो रही हो, तो ध्यान करने का उससे बेहतर समय क्या है? यह वह समय है जब आपकी सजगता का स्तर सर्वोच्च है। सर्वश्रेष्ठ ब्रह्म मुहूर्त ‘ध्यान’ में से एक है सहज समाधि ध्यान।

2. ज्ञान पढ़ें या सुनें

‘अष्टांग हृदय’ के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त आध्यात्मिक ज्ञान और ज्ञान का अनुभव करने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। प्राचीन शास्त्रों का अन्वेषण करें या ज्ञान के सरल सिद्धांतों को फिर से खोजें। धर्मशास्त्र के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त के दौरान शास्त्रों का अध्ययन मानसिक समस्याओं को कम करने में भी मदद करता है।

3. योजना

ब्रह्म मुहूर्त आपको जिस तरह का जागरूकता स्तर और ताजगी देता है, वह आपके जीवन में महत्वपूर्ण चीजों की योजना बनाने का सही समय है: चाहे वह काम हो, वित्त हो या कुछ और।

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4. आत्मनिरीक्षण करें

पिछले दिन के अपने कार्यों को याद करें। ईर्ष्या, क्रोध और लालच जैसी नकारात्मक भावनाओं को आपने कितनी बार याद किया। इन यादों में से किसी को भी आप अपराध बोध में न डूबने दें। बस उन क्षणों के बारे में पता करें। हर रोज ऐसा करने से अंततः इन भावनाओं को महत्त्व देने की आपकी प्रवृत्ति कम हो जाएगी और अंततः बुरे कर्म कम हो जाएँगे।

5. अपने माता-पिता, गुरु और भगवान को याद करें

हमें अक्सर अपने जीवन में सबसे महत्वपूर्ण लोगों को याद करने का समय नहीं मिलता है। ऋषि शौनक कहते हैं, मानसिक रूप से अपने माता-पिता, गुरु, और जिस ऊर्जा को आप मानते हैं, उन्हें याद करें, उसे ईश्वर या सार्वभौमिक ऊर्जा कहते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में यह चीजें नहीं करनी चाहिए

  1. न खाएँ: ब्रह्म मुहूर्त में भोजन करने से बीमारियाँ होती हैं।
  2. तनावपूर्ण गतिविधि न करें: ऐसा कुछ भी न करें जिसके लिए बहुत अधिक मानसिक कार्य की आवश्यकता हो। ऐसा करने से उम्र कम हो जाती है।

क्या सभी को ब्रह्म मुहूर्त में जागना चाहिए?

अष्टांग हृदय के अनुसार, केवल एक स्वस्थ व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में जागना चाहिए। ग्रन्थ में ऐसा भी कहा गया है कि निम्नलिखित लोगों को ब्रह्म मुहूर्त में उठने की कोई पाबंदी नहीं है:

  • गर्भवती महिला
  • बच्चे
  • वृद्ध लोग जो शुरू से ही इस अवधि में नहीं जागे हैं
  • किसी भी शारीरिक और मानसिक बीमारी से पीड़ित लोग
  • जिन लोगों का रात का भोजन नहीं पचा हो
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गुरुदेव का कालातीत ज्ञान

पुस्तक, फोटो फ्रेम और भी बहुत कुछ

यदि आप उपरोक्त लोगों के समूह में नहीं आते हैं, तो ब्रह्म मुहूर्त के दौरान जागना एक अच्छा विचार है। आप बहुत अच्छा महसूस करेंगे और आपकी उत्पादकता में 5 गुना सुधार होना निश्चित है।

डॉ.अंजलि अशोक (श्री श्री आयुर्वेद) तथा पंडित विश्वजीत (वेद अगम संस्कारम महा पाठशाला) से मिली जानकारी के आधार पर।

लेखन : वंदिता कोठारी के अंग्रेजी लेख का हिंदी अनुवाद।

ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurta) पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

‘ब्रह्म’ का अर्थ है परमात्मा और ‘मुहूर्त’ का अर्थ है समय। सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले का समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। आमतौर पर यह सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच का समय होता है। आयुर्वेद और योग के अनुसार, यह समय जागने और साधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
वैज्ञानिक दृष्टि से, इस समय वातावरण में ‘नस्सेंट ऑक्सीजन’ (Nascent Oxygen) की मात्रा अधिक होती है, जो फेफड़ों और शरीर की कोशिकाओं के लिए बहुत लाभकारी है। इस समय प्रदूषण और शोर न्यूनतम होता है, जिससे हमारा मस्तिष्क अधिक कुशलता से काम करता है और कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम रहता है।
ब्रह्म मुहूर्त का समय शारीरिक व्यायाम से अधिक मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास (जैसे ध्यान, प्राणायाम और स्वाध्याय) के लिए उपयुक्त है। इस समय शरीर की ऊर्जा सूक्ष्म होती है, इसलिए भारी जिम वर्कआउट के बजाय योग और सुदर्शन क्रिया जैसे अभ्यास अधिक लाभ पहुँचाते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, इस समय वातावरण में ‘सत्व गुण’ की प्रधानता होती है। इस समय जागने से शरीर में ‘वात’ दोष संतुलित रहता है, जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है, याददाश्त तेज होती है और आयु लंबी होती है। इसे ‘अमृत वेला’ भी कहा जाता है क्योंकि यह आरोग्य प्रदान करने वाला समय है।
आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त वह समय है जब प्रकृति हमें ऊर्जा प्रदान करती है। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी बताते हैं कि इस समय ध्यान करने से मन की गहराई में जाना आसान होता है। यदि आप सुदर्शन क्रिया का अभ्यास इस समय करते हैं, तो इसका प्रभाव पूरे दिन आपको ऊर्जावान और शांत बनाए रखता है।
यद्यपि यह समय सभी के लिए श्रेष्ठ है, लेकिन आयुर्वेद उन लोगों को छूट देता है जो बहुत बीमार हैं, गर्भवती महिलाएँ हैं, या बहुत छोटे बच्चे हैं। स्वस्थ व्यक्तियों और छात्रों के लिए इस समय जागना उनकी एकाग्रता और रचनात्मकता (Creativity) को बढ़ाने के लिए वरदान समान है।
यदि आप अचानक 4 बजे नहीं उठ पा रहे हैं, तो धीरे-धीरे बदलाव करें। अपने वर्तमान समय से 15-20 मिनट पहले उठने का प्रयास करें। आर्ट ऑफ लिविंग के ‘सहज समाधि ध्यान’ या ‘हैप्पीनेस प्रोग्राम’ के माध्यम से आप अपनी नींद की गुणवत्ता सुधार सकते हैं, जिससे सुबह जल्दी जागना आपके लिए सहज और आनंदमय हो जाएगा।

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