विषाक्त व्यक्ति एक तरह का रोगी होता है। उसके भीतर का विषैलापन अथवा कड़वाहट बुद्धिमत्ता की कमी से होती है। इसके कारण हैं – उसकी पृष्ठभूमि, समझ की कमी, अज्ञानता तथा आध्यात्मिक ज्ञान की कमी। जो व्यक्ति आपको चोट पहुँचाता है उसके साथ व्यवहार करते समय बुद्धिमत्ता से काम लें।

कड़वाहट का उत्तर तो दें परंतु प्रतिक्रिया न दिखाएँ

मनुष्य का मन पीड़ित चेतना तथा अपराधी चेतना के मध्य में झूलता रहता है। किसी भी रिश्ते के लिए दोनों ही लाभकारी नहीं हैं। दोनों ही आत्मीयता को नष्ट कर देंगे। यदि आप स्वयं को पीड़ित या चोट खाए हुए मानते हैं तो आप इस रिश्ते को सामान्य नहीं रख पाएँगे। यदि आप स्वयं को अपराधी मानते हैं और जानते हैं कि आपने किसी के साथ गलत किया है तब भी आप एक सामान्य रिश्ता नहीं रख सकते।

आपको इन दोनों के बीच एक सही संतुलन रखना है और स्वयं को इन सभी कार्यों से दूर ले जाना है। प्रतिदिन केवल कुछ मिनटों के लिए ही सही पर दृष्टा भाव में आए। आंतरिक जागरूकता आपको बुद्धिमता से काम लेने में सहायता करेगी।

रिश्ता उस तरह का होना चाहिए जहाँ कुछ दिया जाता है माँगा नहीं जाता। तब यह रिश्ता बढ़ेगा और पोषित होगा, यदि रिश्ते में दूसरे से कुछ पाने की अपेक्षा है, तो ऐसा रिश्ता परेशान करेगा। परंतु जब आपका मनोभाव यह कहता है कि “मैं इस व्यक्ति का एक हिस्सा बनने जा रहा हूँ, इसके लिए मैं जो दे सकता हूँ, दूँगा।’’ तब यह रिश्ता एक स्वस्थ रिश्ता हो सकता है।  

मनुष्य का मन पीड़ित चेतना और अपराधी चेतना के बीच झूलता रहता है। किसी भी रिश्ते के लिए दोनों भाव स्वस्थकर नहीं है।

– गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

जीवनसाथी के साथ धोखा

कोई अपने जीवनसाथी को धोखा क्यों देता है? क्योंकि उनमें उच्च स्तरीय आनंद तथा संतोष की कमी है। दिल पुराने के लिए तरसता है परंतु मन नई चीजों की ओर भागता है। पुराने साथी और नए कंप्यूटर पर गर्व करें, न कि नए साथी और पुराने कंप्यूटर पर।

मन को नई चीजों से खुशी मिलती है परंतु यह खुशी टिकाऊ नहीं होती। जो व्यक्ति धोखा देता है उसे भी नहीं पता कि ऐसा क्यों हुआ? उनके पास जीवन के लिए उच्च संदर्भ नहीं है – वह नहीं जानते कि वह एक सुंदर ऊर्जा के स्रोत हैं; एक विशालता का हिस्सा हैं।

आपको सबसे अधिक चोट तब पहुँचती है जब वह व्यक्ति आपसे झूठ बोले, जिसे आप प्रेम करते हैं। परंतु आप यह जान लें कि वह आपसे सच बोलने की अपेक्षा आपके प्रेम को अधिक महत्व देता है, वह आपके प्रेम को खोने से डरते हैं खोने का भय उनसे झूठ बुलवाता है। 

यदि आप प्रेम को महत्व नहीं देते तो फिर झूठ बोलने की चिंता क्यों करेंगे? आपको उन्हें वह स्थान या स्वतंत्रता देनी चाहिए जहाँ वह अपना दिल खोलकर बात करें।

माँ के साथ रिश्ते में वह स्थान है। आप जानते हैं कि आपकी माँ आपको अस्वीकार या त्याग नहीं करेगी। इसलिए अधिकतर समय में आप उन्हें सब कुछ बता देते हैं। क्या जिससे विवाह किया है उसके साथ ऐसा ही रिश्ता हो सकता है? क्या आप विवाह संबंध में भी ऐसी जगह अथवा स्वतंत्रता बना सकते हैं?

मना करने से क्षमा करना अधिक आसान है।

क्या पति अथवा पत्नी के द्वारा कुछ अक्षम्य प्रतीत होने वाले कार्य को क्षमा कर देना बहुत कठिन है? यदि कुछ बहुत कठिन है तो फिर हम उसे करें क्यों? क्या ऐसा करने से कोई लाभ है? क्या बीती बातों को पकड़ कर रखना ज्यादा आसान है? यदि आप किसी को क्षमा कर रहे हैं तो स्वयं से पूछे कि ऐसा आप किसके लिए कर रहे हैं?

आपको सबसे अधिक चोट तब पहुँचती है जब आपसे वह व्यक्ति झूठ बोलता है जिसे आप प्रेम करते हैं।

– गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

दूसरों के लिए कुछ न करें। यदि आप किसी को अपने लिए क्षमा कर रहे हैं तो बेहतर है कि करें। अन्यथा वह व्यक्ति आपके मन पर कब्जा कर लेता है और आपको दिन रात परेशान करता है। आपका क्रोध आपकी वह सजा है जो दूसरों की गलती के कारण आप स्वयं को दे रहे हैं।

आपको कैसे पता चले कि कोई रिश्ता आपके लिए अच्छा है या बुरा?

जब आप किसी के विषय में निर्णायक बनते हैं तो देख लें कि आप उनसे किस तरह से संबंधित है। उन्हें अपने जीवन में स्थान देने के लिए आपका दिल कितना बड़ा है।

समानांतर रेखाओं की अनुरूपता सर्वोत्तम है यहाँ पर, यदि दो रेखाएँ एक साथ समानांतर रूप से चलती रहती हैं तो वह अनंत समय तक साथ रहती है परंतु यदि वह एक दूसरे पर ध्यान केंद्रित करेंगी तो एक दूसरे को काटेंगी। यदि वह एक दूसरे से हट कर चलेंगी तो बहुत दूर तक चलेंगी। रिश्ते भी इसी तरह हैं।

यदि आप रिश्ते को सदा के लिए बनाए रखना चाहते हैं, तो आपका लक्ष्य या मंजिल तो एक होनी चाहिए, परंतु एक दूसरे पर ध्यान अथवा चौकीदारी न करें। यदि आपका ध्यान एक दूसरे पर ही केंद्रित रहेगा, तो दूसरे व्यक्ति के लिए एक दिन आप शहद जैसे मीठे होंगे और दूसरे दिन कड़वे। लक्ष्य एक ही रखने पर आप काम अच्छे ढंग से कर पाएँगे तथा रिश्ता भी बना रहेगा।

रिश्ते के टूटने की स्थिति

दुखी होना या न होना आपकी अपनी इच्छा है। सहानुभूति रखें। जीवनसाथी को चेतावनी दें। उन्हें बताएँ कि आप बार बार चोट खाते नहीं रह सकते; इससे आप दुखी हो रहे हैं।

अपने साथी से पूछें कि आप जो कुछ भी कह रहे हैं क्या उसे जागरूकता पूर्वक कह रहें हैं। क्या आपका इरादा मुझे चोट पहुँचाना है?

उन्हें आप दो से तीन अवसर दें। तब आप सोचें कि क्या आप अपना मन इस सब से बचना चाहते हैं। यदि अभी भी उनका व्यवहार अच्छा नहीं है तो आप जाने या तो वह सामान्य नहीं है और बीमार है। यदि आपस की सोच मेल नहीं खा रही, तो उनसे कहें “आपका जीवन आपका है और मेरा जीवन मेरा। हम इस प्रकार से नहीं चल सकते’’ और फिर आगे बढ़े।

इस रिश्ते से पहले भी जीवन ठीक था और इस रिश्ते के बाद भी ठीक रहेगा।

– गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

संबंध विच्छेद का सामना करना

जब कोई रिश्ता टूटता है तो आपका दिल भी टूटा है परंतु जागें और देखें। इस रिश्ते से पहले भी आप जीवित थे, चल रहे थे, आप हँस रहे थे, मुस्कुरा रहे थे, खुश थे। ऐसे व्यक्ति से मिलने तथा उसके साथ रिश्ते में बंधने के दिनों को याद करें। जीवन तब भी अच्छा था और रिश्ते के टूटने के बाद भी अच्छा होगा।

आप गोल-गोल घूम कर फिर उसी जगह पर वापस आ गए हैं एक पूरा सर्कल। इसे लेकर परेशान न हों, वह रिश्ता अब समाप्त हो गया।

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