यदि आप नाव चलाना जानते हैं तो आप कोई भी नाव चला सकते हैं। लेकिन अगर आप नाव चलाना नहीं जानते तो नाव बदलने से कुछ नहीं होगा। इसी तरह रिश्ता बदलने से समस्या का समाधान होना जरूरी नहीं है। देर सेवर आप दूसरे रिश्ते में भी उसी स्थिति में होंगे।
अधिकांश लोग एक आदर्श रिश्ते के लिए कहीं और देखते हैं, लेकिन कुछ ही लोग अपने भीतर, उस जगह पर देखते हैं जहाँ से वे संबंध बनाते हैं। ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें हैं:
आपका अपने आप से क्या रिश्ता है? आप अपने आप में कौन हैं?
लोग सोचते हैं: ओह, मैं अकेला हूँ। मैं अकेले रहकर बहुत ऊब गया हूँ। मुझे एक साथी की जरूरत है। यदि आप अपनी ही संगत से इतने ऊब गए हैं, तो सोचिए कि आप किसी और के लिए कितने अधिक उबाऊ होंगे! और अपने आप से ऊब चुके दो लोग एक साथ मिल कर एक दूसरे को पूरी तरह से बोर कर देंगे! एक रिश्ते में जो सबसे महत्वपूर्ण है वह है आपकी अपनी भावनाओं के बारे में समझ, आपका मन, उसे स्थिर रखने की आपकी क्षमता और चीजों को व्यापक परिप्रेक्ष्य से देखने की आपकी योग्यता।
क्या आपका रिश्ता किसी व्यक्तिगत जरूरत पर आधारित है?
यदि आपका रिश्ता व्यक्तिगत जरूरत पर आधारित है, तो यह इतने लंबे समय तक नहीं चल सकता है। एक बार जब जरूरत शारीरिक या भावनात्मक स्तर पर पूरी हो जाती है, तो मन कुछ और ढूंढेगा और कहीं और चला जाएगा। अगर आपका रिश्ता बाँटने के स्तर से है तो यह लंबे समय तक चल सकता है। जब आप अपने साथी से सुरक्षा, प्यार और आराम की तलाश में होते हैं, तो आप कमजोर हो जाते हैं। जब आप कमजोर होते हैं, तो सभी नकारात्मक भावनाएँ उभर आती हैं और आप माँग करने वाले बन जाते हैं। माँग प्रेम को नष्ट कर देती है। अगर हमें बस यह एक बात पता चल जाए तो हम अपने प्यार को सड़ने से बचा सकते हैं।
यह आपकी अपने बारे में सीमित जागरूकता और प्यार का सीमित अनुभव है जो आपको एक छोटे से खोल में बंद कर देता है जहाँ आपका दम घुटने लगता है। हम जो प्यार माँग रहे हैं उसे संभाल भी नहीं सकते क्योंकि हमने कभी अपने मन, अपनी चेतना की गहराई की थाह नहीं ली है।
आर्ट ऑफ लिविंग हैप्पीनेस प्रोग्राम के लिए रजिस्टर करके अपने साथ सही संबंध बनाने के लिए पहला कदम उठाएं।
आर्ट ऑफ लिविंग के दर्शन के अनुसार, किसी भी आदर्श रिश्ते की शुरुआतस्वयं से होती है। यदि आप स्वयं के साथ समय बिताने में बोरियत महसूस करते हैं, तो दूसरा व्यक्ति भी आपकी संगत में ऊब जाएगा। इसलिए, किसी भी सफल रिश्ते के लिए अपने मन को स्थिर रखना और भावनाओं को गहराई से समझना सबसे महत्वपूर्ण है।
नहीं। इस लेख में नाव का एक सटीक उदाहरण दिया गया है: “यदि आपको नाव चलाना नहीं आता, तो नाव बदलने से कोई फायदा नहीं होगा।” ठीक इसी तरह, जब तक आप अपने मन की स्थिति और व्यवहार को ठीक नहीं करते, नया रिश्ता भी आपको वैसी ही समस्याओं में लाकर खड़ा कर देगा। समस्या का समाधान रिश्ता बदलने में नहीं, बल्कि अपने दृष्टिकोण को बदलने में है।
जो रिश्ते केवल व्यक्तिगत जरूरतों (शारीरिक या भावनात्मक) पर टिके होते हैं, वे लंबे समय तक नहीं चलते। जैसे ही वे जरूरतें पूरी हो जाती हैं, इंसान का मन भटकने लगता है। इसके अलावा, रिश्ते में जब आप हमेशा कुछ न कुछ माँगते रहते हैं, तो वह माँग धीरे-धीरे प्यार को नष्ट कर देती है।
रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए उसे माँगने के बजाय बाँटने (Sharing) की नींव पर खड़ा करना चाहिए। जब आप अपने साथी से लगातार सुरक्षा, प्यार और आराम की उम्मीद करते हैं, तो आप मानसिक रूप से कमजोर हो जाते हैं जिससे नकारात्मक भावनाएँ हावी होने लगती हैं। एक खुशहाल रिश्ते में साथी के साथ बिना शर्त खुशी बाँटने का भाव होना चाहिए।
रिश्तों में घुटन हमारी सीमित सजगता और प्रेम के सीमित अनुभव के कारण होती है। हम अक्सर उतना प्यार संभाल ही नहीं पाते जितनी हम माँग करते हैं, क्योंकि हमने कभी अपने मन की गहराई को नहीं समझा। इससे बचने के लिए ध्यान (Meditation) करें और स्वयं को भीतर से मजबूत बनाएँ। आर्ट ऑफ लिविंग का ‘हैप्पीनेस प्रोग्राम’ स्वयं के साथ स्वस्थ संबंध स्थापित करने की दिशा में एक उत्तम कदम है।