सूर्य नमस्कार क्या है? (Surya Namaskar)

सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास हमारे सम्पूर्ण शरीर का व्यायाम है। इसके दैनिक अभ्यास से हमारा शरीर निरोगी, स्वस्थ और चेहरा ओजपूर्ण हो जाता है। महिला हों या पुरुष, बच्चे हों या वृद्ध, सूर्य नमस्कार सभी के लिए बहुत लाभदायक है।

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सूर्य नमस्कार आसन के नाम

सूर्य नमस्कार में बारह आसन होते हैं:

  1. प्रणाम आसन
  2. हस्तोत्तानासन
  3. हस्तपाद आसन
  4. अश्वसंचालन आसन
  5. दंडासन
  6. अष्टांग नमस्कार
  7. भुजंग आसन
  8. पर्वत आसन
  9. अश्वसंचालन आसन
  10. हस्तपाद आसन
  11. हस्तोत्तानासन
  12. ताड़ासन

सूर्य नमस्कार के लाभ (Surya Namaskar Benefits)

सूर्य नमस्कार से हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर शरीर के सभी अंगो के लिए बहुत से लाभ हैं। सूर्य नमस्कार सिर से लेकर पैर तक शरीर के सभी अंगो को बहुत लाभान्वित करता है। यही कारण है कि सभी योग विशेषज्ञ इसके अभ्यास पर विशेष बल देते हैं। सूर्य नमस्कार के अभ्यास से शरीर, मन और आत्मा सबल होते हैं। सूर्य नमस्कार के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कई निम्नलिखित लाभ हैं:

1. शरीर स्वस्थ और हृष्ट- पुष्ट बनता है

सूर्य नमस्कार न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करता है बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है। सूर्य नमस्कार के 12 आसन हमारे पूरे शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों को स्वस्थ और निरोगी बनाए रखते हैं।

2. बेहतर होता है पाचन तंत्र

सूर्य नमस्कार के आसन हमारे पेट के आंतरिक भाग को मजबूत बनाए रखने में सहायता करते हैं। यदि आप नियमित रूप से सूर्य नमस्कार कर रहे हैं तो आपका पाचन तंत्र मजबूत रहता है और पेट से संबंधित बिमारियाँ आपको परेशान नहीं करतीं।

3. पेट की चर्बी घटती है 

सूर्य नमस्कार करने से पेट की चर्बी घटती है। जो लोग दिन-रात गूगल पर पेट की चर्बी कम करने के उपाय ढूंढते रहते हैं, उनके लिए यह खुशखबरी है। आज से ही सूर्य नमस्कार को अपने दैनिक जीवन का अंग बना लें। कुछ दिन में आप अपने आपको फिट पाएंगे।

4. शरीर का डीटॉक्स करता है

हमारा शरीर, आए दिन के तनाव और जीवन शैली के बदलाव के कारण विषाक्त पदार्थ इकठ्ठा करता रहता है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास हमारे शरीर के अनचाहे विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में हमारी मदद करता है।

5. चिंता और तनाव को दूर रखता है

सूर्य नमस्कार न केवल हमें शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रखता है बल्कि मानसिक रूप से भी चिंतामुक्त और तनावमुक्त बनाए रखता है। सूर्य नमस्कार के 12 आसन हमें दिन भर तरोताजा अनुभव करने में हमारी मदद करते हैं।

6. शरीर को लचीला बनाए रखने में मदद करता है

सूर्य नमस्कार 12 आसनों का एक व्यायाम है। इसके अलग-अलग आसन, शरीर के अलग-अलग अंगों पर अपना प्रभाव डालते हैं। जब हम एक आसन से दूसरे आसन में जाते हैं तो व्यायाम की निरंतरता बनी रहती है और हमारे शरीर के सभी अंगों में लचीलापन और मजबूती आती है। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से शरीर में अकड़न नहीं रहती और हम अधिक लचीला अनुभव करते हैं।

7. मासिक-धर्म नियमित रहता है

जो महिलाएं अपने मासिक धर्म में अनियमितता से परेशान हैं, सूर्य नमस्कार उनके लिए वरदान हो सकता है। नियमित सूर्य नमस्कार पेट के निचले हिस्से, नितम्ब, गर्भाशय (यूट्रस) और अंडाशय (ओवरी) को स्वस्थ बनाता है और मासिक धर्म की अनियमितता की समस्या को जड़ से दूर भगाता है।

स्वास्थ्य के प्रति सचेत महिलाओं के लिए यह एक वरदान है। इससे न केवल अतिरिक्त कैलोरी कम होती है बल्कि पेट की मांसपेशियो के सहज खिचाव से बिना खर्च सही आकार पाया जा सकता है। सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास महिलाओं के मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करता है और प्रसव को भी आसान करता है। साथ ही, यह चेहरे पर निखार वापस लाने में मदद करता है, झुर्रियों को आने से रोकता है और चिरयुवा तथा कांतिमय बनाता है।

8. अंतर्दृष्टि (इंट्यूशन) विकसित होती है

सूर्य नमस्कार व ध्यान के नियमित अभ्यास से मणिपुर चक्र बादाम के आकार से बढ़कर हथेली के आकार का हो जाता है। मणिपुर चक्र का यह विकास जो कि दूसरा मस्तिष्क भी कहलाता है, अंतरदृष्टि विकसित कर, अधिक स्पष्ट और केंद्रित बनाता है। मणिपुर चक्र का सिकुड़ना अवसाद और दूसरी नकारात्मक प्रवृत्तियों की ओर ले जाता है।

सूर्य नमस्कार के ढेरों लाभ हमारे शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखते हैं, इसलिए सभी योग विशेषज्ञ सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास पर विशेष बल देते हैं।

9. रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है

सूर्य नमस्कार से रीढ़ की हड्डी के निचले भाग से लेकर ऊपरी भाग तक बढ़िया व्यायाम होता है। इससे रीढ़ की हड्डी को लचीलापन और मजबूती दोनों मिलते हैं।

10. बच्चों में एकाग्रता बढ़ाता है

सूर्य नमस्कार मन शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। आजकल बच्चे प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं इसलिए उन्हें नित्यप्रति सूर्य नमस्कार करना चाहिए क्योंकि इससे उनकी सहनशक्ति बढ़ती है और परीक्षा के दिनों की चिंता और असहजता कम होती है।

सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में शक्ति और ओज की वृद्धि होती है। यह माँसपेशियों का सबसे अच्छा व्यायाम है और हमारे भविष्य के खिलाड़ियों के मेरुदण्ड और दूसरे अंगो के लचीलेपन को बढ़ाता है। 5 वर्ष से बच्चे नियमित सूर्य नमस्कार करना प्रारंभ कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार के पीछे का विज्ञान

सूर्य नमस्कार करने की विधि जानना ही पर्याप्त नहीं है, इस प्राचीन विधि के पीछे का विज्ञान समझना भी आवश्यक है। इस पवित्र व शक्तिशाली योगिक विधि की अच्छी समझ, इस विधि के प्रति उचित सोच व धारणा प्रदान करती है। यह सूर्य नमस्कार की सलाहें आपके अभ्यास को बेहतर बनाती हैं और सुखकर परिणाम देती हैं।

भारत के प्राचीन ऋषियों के द्वारा ऐसा कहा जाता है कि शरीर के विभिन्न अंग विभिन्न देवताओं (दिव्य संवेदनाए या दिव्य प्रकाश) के द्वारा संचालित होते है। मणिपुर चक्र (नाभि के पीछे स्थित जो मानव शरीर का केंद्र भी है) सूर्य से संबंधित है। सूर्य नमस्कार के लगातार अभ्यास से मणिपुर चक्र विकसित होता है, जिससे व्यक्ति की रचनात्मकता और अंतर्ज्ञान बढ़ते हैं। यही कारण था कि प्राचीन ऋषियों ने सूर्य नमस्कार के अभ्यास पर इतना बल दिया।

मणिपुर चक्र में ही हमारे भाव एकत्रित होते हैं और यही वह स्थान है जहाँ से अंतःप्रज्ञा विकसित होती है। सामान्यतया मणिपुर चक्र का आकार आँवले के बराबर होता है लेकिन जो योग ध्यान के अभ्यासी हैं उनका मणिपुर चक्र 3 से 4 गुणा बड़ा हो जाता है। जितना बड़ा मणिपुर चक्र उतनी ही अच्छी मानसिक स्थिरता और अन्तर्ज्ञान हो जाते हैं।

– गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

सूर्य नमस्कार कब करें?

सूर्य नमस्कार सुबह के समय खुले में पूर्व दिशा में, उगते सूरज की ओर करने की सलाह दी जाती है। उगते सूर्य के प्रकाश से हमारे शरीर को ‘विटामिन डी’ मिलता है, हड्डियाँ मजबूत होती हैं, त्वचा स्वस्थ रहती है और मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलती है।

सूर्य नमस्कार के आसन, हल्के व्यायाम और योगासनों के बीच की कड़ी की तरह है और खाली पेट कभी भी किए जा सकते हैं। हालांकि सूर्य नमस्कार के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यह मन व शरीर को ऊर्जावान कर तरो ताजा कर देता है और दिनभर के कार्यों के लिए तैयार कर देता है। यदि यह दोपहर में किया जाता है तो यह शरीर को तत्काल ऊर्जा से भर देता है, वहीं शाम को करने पर तनाव को कम करने में मदद करता है। यदि सूर्य नमस्कार तेज गति से किया जाए तो बहुत अच्छा व्यायाम साबित हो सकता है, वजन और मोटापा घटाने में भी सूर्य नमस्कार बहुत लाभदायक है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सूर्य नमस्कार (Sun Salutation) 12 शक्तिशाली योग मुद्राओं का एक क्रम है। यह न केवल एक शारीरिक व्यायाम है, बल्कि एक संपूर्ण कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट भी है जो शरीर, मन और श्वास के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।
सूर्य नमस्कार करने का सर्वोत्तम समय सूर्योदय है। खाली पेट सूर्य की ओर मुख कर के इसे करने से शरीर को अधिकतम ऊर्जा और विटामिन-डी मिलता है। यदि सुबह संभव न हो, तो इसे शाम को सूर्यास्त के समय भी किया जा सकता है।
हाँ, सूर्य नमस्कार वजन घटाने का एक उत्तम उपाय है। यदि इसे तेज गति से किया जाए, तो यह एक शानदार कार्डियो वर्कआउट बन जाता है, जो पेट की चर्बी कम करने और पूरे शरीर को टोन करने में मदद करता है।
नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने के कई लाभ हैं:
1. पाचन में सुधार: इसके आसनों से पेट के अंगों की मालिश होती है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है।
2. लचीलापन: यह माँसपेशियों और जोड़ों को लचीला बनाता है।
3. तनाव मुक्ति: प्राणायाम और आसन का मिश्रण मानसिक शांति देता है और चिंता कम करता है।
4. डिटॉक्सिफिकेशन: सही ढंग से साँस लेने और छोड़ने से फेफड़े साफ होते हैं और रक्त का संचार बेहतर होता है।
5. त्वचा और बालों के लिए: बेहतर रक्त संचार से चेहरे पर चमक आती है और बालों का झड़ना कम होता है।
आमतौर पर माहवारी के दौरान भारी व्यायाम से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, यह व्यक्तिगत शरीर की क्षमता पर निर्भर करता है। बेहतर है कि उन दिनों में हल्के स्ट्रेचिंग वाले आसन करें या विश्राम करें।
इन परिस्थितियों में सूर्य नमस्कार करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें:
1. गर्भवती महिलाएँ (तीसरे महीने के बाद)।
2. हर्निया या उच्च रक्तचाप (High BP)  के रोगी।
3. पीठ दर्द या स्लिप डिस्क की गंभीर समस्या होने पर।
4. गठिया या कलाई की चोट की स्थिति में।
शुरुआत में आप 2 से 4 चक्रों (Rounds) से शुरू कर सकते हैं। धीरे धीरे अपनी क्षमता के अनुसार इसे बढ़ाकर 12 चक्रों तक ले जाना एक आदर्श लक्ष्य माना जाता है।
नहीं, योग या सूर्य नमस्कार के तुरंत बाद पानी पीने से बचना चाहिए। शरीर का तापमान सामान्य होने के लिए कम से कम 15-20 मिनट तक प्रतीक्षा करना बेहतर होता है।

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