एक शक्ति है, एक रहस्यमय ऊर्जा जिससे सब जगत चलायमान है। वैज्ञानिक अभी तक इसे कोई नाम नहीं दे पाए हैं। हालांकि प्राचीन काल के ऋषियों और संतों ने इस अज्ञात शक्ति को शिव कहा है।

शिव वह ऊर्जा है जो हर जीव के भीतर मौजूद है। इस ऊर्जा के कारण ही हम अपनी दैनिक गतिविधियाँ जैसे साँस लेना, खाना, उठाना, चलना और बैठना कर पाते हैं। यह ऊर्जा न केवल जीवित प्राणियों को चलाती है, बल्कि यह निर्जीव वस्तुओं में भी कार्य करती है। इस प्रकार शिव अस्तित्व को संचालित करते हैं।

इस महाशिवरात्रि, वैदिक मंत्रों की दिव्य शक्ति और गहरे ध्यान का अनुभव करें। गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी की पावन सान्निध्य में, 15 फरवरी 2026 को आर्ट ऑफ लिविंग बेंगलुरु आश्रम में जीवन को रूपांतरित कर देने वाले इस उत्सव में भाग लें

हम महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

महाशिवरात्रि पर्व है हमारी चेतना को बढ़ाने का और ध्यान के माध्यम से प्राण शक्ति को बढ़ाकर अपने स्त्रोत की ओर ले जाने का। 

पर, शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? वैसे तो महाशिवरात्रि को लेकर कई कहानियाँ मौजूद हैं। उनमें से कुछ का यहाँ उल्लेख किया जा रहा है:

  • कहते हैं महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती से विवाह किया था। 
  • जब देवता और राक्षस अमृत की खोज में समुद्र मंथन कर रहे थे तब मंथन से विष निकला था। स्वयं भगवान शिव ने विष पी कर उसे अपने कंठ में रोक लिया था, जिस वजह से उनका शरीर नीला पड़ गया था और उनको “नीलकंठ” भी कहा जाता है। विष पीकर उन्होंने सृष्टि और देवतागण दोनों को बचा लिया, इसलिए भी शिवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है।
  • एक और किवदंती यह है कि जब देवी गंगा पूरे उफान के साथ पृथ्वी पर उतर रहीं थीं तब भगवान शिव ने ही उन्हें अपनी जटाओं में धरा था। जिससे पृथ्वी का विनाश होने से बच गया था। इसलिए भी इस दिन को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और इस दिन शिवलिंग का अभिषेक भी किया जाता है।
  • ऐसी मान्यता भी है कि भगवान ने शिवरात्रि के दिन सदाशिव, जो कि निराकार रूप हैं, उससे लिंग स्वरुप लिया था। इसलिए भक्त रात भर जागकर भगवान शिव की अराधना करते हैं।

महाशिवरात्रि के दिन क्या करें?

महाशिवरात्रि वह दिन है जब हम भगवान शिव की अराधना करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन अधिकतर लोग ध्यान, पूजा और शिव भजन गाकर उत्सव मानते हैं। इनमें से कुछ में आप भी भाग ले सकते हैं:

1. उपवास

उपवास से शरीर के हानिकारक पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और शरीर की शुद्धि होती है जिससे मन को शान्ति मिलती है। जब मन शांत होता है तब वह आसानी से ध्यान में चला जाता है। इसलिए, महाशिवरात्रि पर उपवास करने से मन तथा चित्त को विश्राम मिलता है। ऐसी सलाह दी जाती है कि इस दिन फल अथवा ऐसा भोजन ग्रहण करें जो सुपाच्य हो। महाशिवरात्रि उपवास के बारें में और अधिक जानें।

2. ध्यान

महाशिवरात्रि की रात को नक्षत्रों की स्थिति ध्यान के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। इसलिए, लोगों को शिवरात्रि पर जागते रहने और ध्यान करने की सलाह दी जाती है। प्राचीन काल में, लोग कहते थे, ‘यदि आप हर दिन ध्यान नहीं कर सकते हैं, तो साल में कम से कम एक दिन ध्यान अवश्य करें। महाशिवरात्रि को रात्रि जागरण करें और ध्यान करें।’

3. मंत्रोच्चारण

  • महाशिवरात्रि के दिन “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का उच्चारण सबसे लाभदायक है। यह मंत्र तुरंत ही आपकी उर्जा को ऊपर उठाता है।
  • मंत्र में “ॐ” की ध्वनि ब्रह्मांड की ध्वनि है। जिसका तात्पर्य है प्रेम और शान्ति। “नम: शिवाय” में यह पाँच अक्षर “न”, “म”, “शि”, “वा”, “य” पाँच तत्त्वों की ओर इशारा करते हैं। वह पाँच तत्त्व हैं – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश।
  • “ॐ नम: शिवाय” का जप करने से ब्रह्मांड में मौजूद इन पाँच तत्त्वों में सामंजस्य पैदा होता है। जब इन पाँच तत्त्वों में प्रेम, शान्ति का सामंजस्य होता है, तब परमानंद प्रस्फुटित होता है।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र के जप के साथ आप शिव लिंगाष्टकम, शिव तांडव स्तोत्र और कालभैरव अष्टकम का जप भी कर सकते हैं।

4. महाशिवरात्रि पूजा / रूद्र पूजा में भाग लें

रूद्र पूजा या महाशिवरात्रि पूजा भगवान शिव के सम्मान में की जाने वाली पूजा है। महाशिवरात्रि के दिन, रूद्र पूजा का बड़ा महत्व है, इस पूजा में विशेष अनुष्ठानों के साथ, वैदिक मंत्रों का उच्चारण भी शामिल है। रूद्र पूजा से वातावरण में सकारात्मकता और पवित्रता का उदय होता है। यह नकारात्मक विचारों और भावनाओं को परिवर्तित कर देता है। पूजा में बैठने से और मंत्रों को सुनने से मन सहज ही गहन ध्यान में उतर जाता है।

5. शिवलिंग की उपासना

शिवलिंग निराकार शिव का ही प्रतीक है। शिवलिंग पूजा में “बेल पत्र” अर्पण किया जाता है। शिवलिंग को “बेल पत्र” अर्पण करना अर्थात तीन गुण शिव तत्व को समर्पित कर देना। तमस (वह गुण जिससे जड़ता उत्त्पन होती है), रजस (वह गुण जो गतिविधियों का कारक है), सत्व (वह गुण जो सकारात्मकता, रचनात्मकता और जीवन शान्ति लाता है)। यह तीनों गुण आपके मन और कार्यों को प्रभावित करते हैं। इन तीनों गुणों को दिव्यता को समर्पण करने से शांति और स्वतंत्रता प्राप्त होती है।

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महाशिवरात्रि (Mahashivratri): अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

‘शिव’ का अर्थ है कल्याणकारी और ‘रात्रि’ का अर्थ है विश्राम। महाशिवरात्रि वह रात है जब हम शिव तत्व (परम चेतना) की शरण में जाकर गहरा विश्राम पाते हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार, यह केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि अपनी आत्मा के करीब आने और अपनी चेतना को जागृत करने का एक विशेष अवसर है।
महाशिवरात्रि पर चार मुख्य क्रियाएँ अत्यंत फलदायी मानी जाती हैं:
1. उपवास (Fasting): शरीर को शुद्ध करने और मन को अंतर्मुखी करने के लिए।
2. मौन और ध्यान (Meditation): इस दिन की ऊर्जा ध्यान को बहुत गहरा बनाती है।
3. मंत्र जाप: ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप मन को शांत और एकाग्र करता है।
4. रात्रि जागरण: रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर जागते रहने से ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन (ऊपर की ओर प्रवाह) होता है।
आयुर्वेद और आध्यात्मिकता के अनुसार, उपवास करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर की अशुद्धियाँ दूर होती हैं। जब शरीर हल्का होता है, तो मन अधिक सजग रहता है। महाशिवरात्रि पर किया गया व्रत संकल्प शक्ति को बढ़ाता है और ध्यान के दौरान गहरे अनुभव प्रदान करने में सहायक होता है।
महाशिवरात्रि की रात को ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि मानव शरीर में ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर बढ़ती है। यदि हम इस रात अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर जागते हैं (जैसे ध्यान या कीर्तन के दौरान), तो यह हमारे शारीरिक और मानसिक विकास में बहुत सहायता करता है। आर्ट ऑफ लिविंग में इस रात सामूहिक ध्यान और सत्संग का आयोजन विशेष रूप से किया जाता है।
शिव लिंग निराकार चैतन्य का प्रतीक है। अभिषेक (जैसे दूध, जल या शहद अर्पण करना) श्रद्धा की अभिव्यक्ति है। आध्यात्मिक रूप से, यह अपनी आत्मा को ज्ञान और प्रेम से सराबोर करने का प्रतीक है। मंत्रों के साथ किया गया अभिषेक वातावरण में सकारात्मक कंपन (Vibrations) पैदा करता है जो मन को शांति देते हैं।
आर्ट ऑफ लिविंग में महाशिवरात्रि एक वैश्विक उत्सव की तरह मनाई जाती है। हजारों लोग बैंगलोर आश्रम में या ऑनलाइन माध्यम से रुद्र पूजा, शक्तिशाली ध्यान और गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के सानिध्य में सत्संग में भाग लेते हैं। यहाँ का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को स्वयं के भीतर स्थित ‘शिव तत्व’ का अनुभव कराना है।
हाँ, क्योंकि इस दिन प्रकृति स्वयं साधक की मदद करती है। महाशिवरात्रि पर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा होता है, जिससे एक नौसिखिया (Beginner) भी ध्यान की गहराई का अनुभव आसानी से कर सकता है। इस दिन सामूहिक ध्यान करने से उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

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