देवताओं को आहुति दिए बिना पूजा संपूर्ण नहीं होती। शिव बड़े ही भोले भाले हैं; इसलिए उनको भोलेनाथ भी कहा जाता है क्योंकि उनकी कोई चाह नहीं है। यदि चढ़ावे के रूप में आप उनको कुछ अर्पित करना चाहते हैं तो ‘बेल पत्र’ सबसे उत्तम है। ‘बेल पत्र’ अर्पित करने का अर्थ है प्रकृति के तीनों गुणों – तमस, रजस और सत्व को समर्पित करना। अपने जीवन में घटित होने वाली सभी सकारात्मकता और नकारात्मकता को शिव को समर्पित कर दें और विश्राम करें।

– गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

बेल पत्र क्या है?

बेल पत्र एक पौधा है जिसे संस्कृत में बिल्वपत्र भी कहते हैं। “बिल्व” का अर्थ है बेल और “पत्र” का अर्थ है पत्ता। बेल पत्र के पौधे का फल भी आता है, इसकी खोल सख्त होती है और इसका स्वाद खट्टा मीठा होता है। पूरे भारतवर्ष में इसे विभिन्न नाम से पुकारा जाता है। इस पौधे का अपना सांस्कृतिक, सामाजिक और चिकित्सकीय मूल्य है।

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हम भगवान शिव को बेल पत्र क्यों अर्पित करते हैं?

भगवान शिव की उपासना या पूजा अर्चना में बेल पत्र का होना आवश्यक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की बेल पत्र भगवान शिव को अतिप्रिय है। बेल पत्र के तीनो पत्ते त्रिमूर्ति – ब्रम्हा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं। वेदों के अनुसार बेल पत्र के तीनों पत्ते भगवान शिव के त्रिनेत्र का भी प्रतीक हैं। 

भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करते समय इतना ध्यान अवश्य रखें की बेल पत्र खंडित (पत्ते का कटा होना या पत्ते में कोई छिद्र होना) न हो। 

जैन धर्म का अवलंबन करने वाले भी बेल पत्र को बहुत शुभ मानते हैं। ऐसा माना जाता है की 23वें तीर्थंकर श्री प्रशावंथा जी को बेल पत्र के पेड़ के नीचे ही निर्वाण की प्राप्ति हुई थी।

बेल पत्र के चौंका देने वाले लाभ

बेल पत्र के पत्तों के विविध उपयोग के बारे में भी आपको जानना चाहिए। त्वचा संबंधी समस्याओं को ठीक करने के लिए, फेस पैक के रूप में भी इनका उपयोग किया जाता है। इसके पत्तों का ताजा रस भी पिया जाता है। हर रूप में बेल पत्र लाभकारी है।

1. बेल पत्र के चिकित्सकीय लाभ

बेल पत्र के बहुत ही औषधीय लाभ भी हैं। इसका फल विटामिन और खनिजों का एक समृद्ध स्त्रोत है जिसमें विटामिन सी, विटामिन ए, कैल्शियम, पोटेशियम, फाइबर, विटामिन बी1, बी6 और बी12 शामिल हैं – जो शरीर के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं।  

आयुर्वेद के अनुसार हमारी प्रकृति में तीन प्रकार के दोष होते हैं वात्त, पित्त एवं कफ और बेल पत्र के सेवन से यह तीनों दोष संतुलित हो जाते हैं। बेल पत्र के सेवन से उदर सम्बंधित बीमारियाँ जैसे दस्त, पेचिश, उल्टी भी ठीक हो जाती हैं। इसके सेवन से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय सम्बंधित समस्याओं को ठीक करने में और कोलेस्ट्रोल को संतुलित करने में भी बेल पत्र बहुत लाभदायक है।

2. बेल पत्र के लाभ त्वचा के लिए

बेल पत्र में उपस्थित खनिज पदार्थ और विटामिन की मदद से आपकी त्वचा की खोई हुई चमक वापस आ जाती है। इसके सेवन से सूखी त्वचा की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है और चेहरे पर होने वाले काले घेरे भी कम हो जाते हैं। बेल पत्र के पत्तों को कुछ देर गुनगुने पानी में भिगो कर फिर उसी पानी से सिर धोने से बालों में होने वाली रूसी कम हो जाती है।
बेल पत्र के पत्तों का रस पीने से या इनका सेवन करने से बालों के झड़ने में कमी आती है और बालों का रुखापन भी कम होता है।
बेल पत्र के पत्तों के लेप से त्वचा में होने वाली सफेद दाग की समस्या भी ठीक हो जाती है।

3. बेल पत्र को घर में कैसे उगाएँ और इससे वास्तु में क्या लाभ मिलता है

बेल पत्र का पौधा हम बहुत कम स्थानों पर पाते हैं क्योंकि यह आमतौर पर जंगल में उगाया जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार, देवी पार्वती के पसीने की बूँद से पौधे की बेल बढ़ जाती है और इसलिए इसे बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। इस पौधे को उगाने का अथवा लगाने का सबसे अच्छा समय सावन का है। बेल पत्र का पौधा सभी नकारात्मकताओं को दूर करता है और आसपास के वातावरण को सकारात्मकता से भर देता है। इस पौधे से स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों है। यह पौधा ज्ञान अर्जन में भी लाभकारी है, यदि आप प्रत्येक दिन इस पेड़ के नीचे मिट्टी का दीया जलाएँ तो इससे आपके ज्ञान में वृद्धि अवश्य होगी।

बेल पत्र रस की विधि

गर्मियों के दिनों में बेल पत्र के फल का शरबत बनाया जाता है, इसे एक शीतल पेय के रूप में पिया जाता है। आप इस शरबत को घर पर भी बना सकते हैं, इसे बनाने की विधि है:

सामग्री

  • बेल पत्र फल – 1
  • पानी – 1 या 2 ग्लास
  • नींबू – आधा
  • पुदीने के पत्ते – 4-5
  • गुड़ – स्वाद अनुसार

विधि:

  • बेल पत्र फल की लुगदी को निकालें
  • लुगदी को एक कटोरे में लें, उसमें पानी डालें
  • लुगदी को पानी में घोलें और फिर उसे छान कर बीज को अलग कर लें
  • पुदीने के पत्तों को पीस लें
  • एक ग्लास लें और पिसे हुए पुदीने के पत्तों और नींबू के रस को मिलाएँ
  • रस को ग्लास में अच्छे से छान मिला लें

नोट: बेल का फल प्राकृतिक रूप से मीठा होता है लेकिन आप चाहें तो उसमें स्वादानुसार गुड़ के रस को मिला सकते हैं।

बेल पत्र पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी बताते हैं कि बेल पत्र अर्पित करना प्रकृति के तीनों गुणों— तमस, रजस और सत्व को शिव को समर्पित करने का प्रतीक है। इसके तीन पत्ते त्रिदेव (ब्रह्म, विष्णु, महेश) और शिव के त्रिनेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। शिव ‘अकिंचन’ (जिन्हें कुछ नहीं चाहिए) हैं, इसलिए उन्हें प्रकृति की यह सरल भेंट अतिप्रिय है।
पूजा के लिए बेल पत्र हमेशा अखंडित होना चाहिए। इसका अर्थ है कि पत्ता कहीं से कटा-फटा नहीं होना चाहिए और न ही उसमें कोई छिद्र होना चाहिए। खंडित पत्र पूजा में स्वीकार्य नहीं माना जाता।
बेल पत्र औषधीय गुणों का खजाना है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
1. पाचन तंत्र: दस्त, पेचिश और गैस की समस्या में राहत दिलाता है।
2. त्रिदोष संतुलन: यह शरीर के वात, पित्त और कफ दोषों कोसंतुलित करता है।
3. दीर्घकालिक बीमारियाँ: मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक।
4. पोषक तत्व: विटामिन ए, सी, कैल्शियम, पोटेशियम और फाइबर का समृद्ध स्रोत।
त्वचा के लिए: इसका रस पीने से त्वचा की चमक बढ़ती है और आँखों के चारों ओर होने वाले काले घेरे कम होते हैं। इसके लेप से सफेद दाग की समस्या में भी सुधार होता है।
बालों के लिए: पत्तों को गुनगुने पानी में भिगोकर उस पानी से सिर धोने से रूसी खत्म होती है और बालों का झड़ना कम होता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेल पत्र का पौधा घर से सभी नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर कर सकारात्मकता लाता है।
1. यह घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य सुनिश्चित करता है।
2. यदि इस पेड़ के नीचे नियमित रूप से मिट्टी का दीपक जलाया जाए, तो यह ज्ञान अर्जन में बहुत सहायक माना जाता है।
3. इसे लगाने का सबसे शुभ समय सावन का महीना है।
हाँ, बेल का फल अपने शीतल प्रभाव के लिए जाना जाता है। गर्मियों में इसका शरबत पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और पाचन अग्नि मजबूत होती है। यह प्राकृतिक रूप से मीठा और विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स से भरपूर होता है।
जैन धर्म में भी बेल पत्र को अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि 23वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ जी को बेल के वृक्ष के नीचे ही निर्वाण की प्राप्ति हुई थी।

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