भ्रामरी प्राणायाम का नाम भारत में पाई जाने वाली काले रंग की मधुमक्खी, भ्रामरी (भँवरा) के नाम से पड़ा है। भ्रामरी प्राणायाम मन को तत्काल शांत करता है। यह प्राणायाम मन को उत्तेजना, निराशा और चिंता से मुक्त करने के लिए एक उत्तम श्वसन तकनीक है और यह बहुत हद तक क्रोध को भी दूर करता है। यह एक साधारण तकनीक है जिसे कार्यस्थल या घर, किसी भी स्थान पर किया जा सकता है और तनावमुक्त होने के लिए तात्कालिक विकल्प है।

इस प्राणायाम में बाहर जाने वाली साँस की ध्वनि मधुमक्खी की गुंजन जैसी होती है, इसलिए इस का नाम ‘भ्रामरी’ रखा गया है।

भ्रामरी प्राणायाम के पीछे का विज्ञान

यह प्राणायाम तंत्रिकाओं, विशेष रूप से मस्तिष्क और माथे के आस पास की तंत्रिकाओं को शांत करता है और उन्हें विश्राम देता है। भिनभिनाहट जैसी ध्वनि की तरंगों का प्रभाव प्राकृतिक रूप से ही शांत करने वाला होता है।

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भ्रामरी प्राणायाम करने की विधि (Bhramari Pranayama Steps in Hindi)

  1. किसी हवादार, शांत कोने में आँखें बंद करके सीधे बैठ जाएँ। चेहरे पर एक हल्की मुस्कान बनाए रखें।
  2. कुछ समय के लिए अपनी आँखें बंद ही रखें। शरीर में होने वाली संवेदनाओं और भीतरी शांति को अनुभव करते रहें।
  3. अपनी तर्जनी उंगली को अपने कानों पर रखें। आपके गाल और कान के बीच में एक उपास्थि (नरम हड्डी) होती है। तर्जनी उंगली को इसी उपास्थि पर रखें।
  4. एक गहरी लंबी श्वास लें और जैसे जैसे साँस छोड़ते हैं, मधुमक्खी जैसी तेज भिनभिनाहट वाली ध्वनि निकालते हुए उक्त उपास्थि को धीरे से दबाते रहें। आप उंगली से इसको निरंतर दबा कर रख सकते है अथवा उंगली से उपास्थि को बारी बारी से दबाते और छोड़ते रह सकते हैं।
  5. आप धीमी ध्वनि में भी यह प्रक्रिया कर सकते है किंतु श्रेष्ठतर परिणामों के लिए उच्च स्वर वाली ध्वनि निकालना उत्तम विकल्प है।
  6. पुनः श्वास लें और यही प्रक्रिया 3 से 4 बार तक दोहराएँ।

भ्रामरी प्राणायाम से पहले और बाद में करने वाले आसन

सामान्यतः यह प्राणायाम वार्म अप के पश्चात योगासन करने से पहले किया जाता है। लेकिन आप इसे बाद में भी कर सकते हैं।

भ्रामरी प्राणायाम में विविधताएँ

आप अपनी पीठ पर अथवा दायीं करवट लेट कर भी भ्रामरी प्राणायाम कर सकते हैं। लेट कर भ्रामरी प्राणायाम करते हुए केवल भिनभिनाहट जैसे ध्वनि निकालते रहें, अपनी तर्जनी उंगली को कान पर रखने की आवश्यकता नहीं है। आप भ्रामरी प्राणायाम दिन में 3 या 4 बार भी कर सकते हैं।

भ्रामरी प्राणायाम वीडियो

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ (Bhramari Pranayama ke fayde)

  • तनाव, आक्रोश और चिंता से तत्काल राहत देता है। उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह अतिप्रभावशाली श्वसन तकनीक है क्योंकि यह उत्तेजित मन को शांत कर देता है।
  • यदि आपको ज्वर अथवा हल्का सिरदर्द है तो यह उसमें भी राहत प्रदान करता है।
  • माइग्रेन जैसी समस्या को भी कम करता है। 
  • एकाग्रता तथा स्मरण शक्ति में सुधार लाता है।
  • आत्मविश्वास सुदृढ़ करता है।
  • रक्तचाप कम करता है।
  • ध्यान की तैयारी के लिए मन को शांत करता है।

सावधानियाँ

  • सुनिश्चित करें कि आप अपनी उंगली कान के भीतर न डाल कर कान की उपास्थि पर ही रख रहे हैं।
  • उपास्थि को बहुत जोर से न दबाएँ। उसे अपनी उंगली से हल्का सा दबाएँ और छोड़ें।
  • भिनभिनाहट जैसी ध्वनि निकालते हुए अपना मुँह बंद रखें।
  • आप हाथों की उँगलियों को षण्मुखी मुद्रा में रख कर भी भ्रामरी प्राणायाम कर सकते हैं।
  • अपने चेहरे पर दबाव न डालें।
  • 3-4 बार की अनुशंसित पुनरावृत्ति से अधिक न करें।

निषेध

कोई भी नहीं। किसी योग प्रशिक्षक से इसे ठीक प्रकार से करने की विधि सीख कर, बच्चे से वयोवृद्ध, कोई भी व्यक्ति इस प्राणायाम को कर सकता है। इसे करने की एक ही शर्त है कि इसे खाली पेट ही किया जाए।

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भ्रामरी प्राणायाम (Bee Breath) पर  अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

भ्रामरी प्राणायाम एक प्रभावी श्वसन तकनीक है जिसमें सांस छोड़ते समय मधुमक्खी की तरह गुंजन (Humming) की आवाज़ निकाली जाती है। संस्कृत में ‘भ्रमर’ का अर्थ है ‘मधुमक्खी’, इसीलिए गुंजन की ध्वनि के कारण इसे ‘भ्रामरी’ कहा जाता है। आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार, यह मन को तुरंत शांत करने के सबसे सरल तरीकों में से एक है।
भ्रामरी प्राणायाम के नियमित अभ्यास से कई शारीरिक और मानसिक लाभ मिलते हैं:
1. तनाव और चिंता से मुक्ति: यह मन को शांत कर क्रोध और बेचैनी को कम करता है।
2. एकाग्रता में सुधार: छात्रों और मानसिक कार्य करने वालों के लिए यह स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक है।
3. उच्च रक्तचाप (High BP) में राहत: यह हृदय प्रणाली को शांत करता है।
4. अनिद्रा (Insomnia) का उपचार: सोने से पहले इसका अभ्यास करने से गहरी और अच्छी नींद आती है।
हाँ, भ्रामरी के दौरान निकलने वाली ‘हम्मिंग’ ध्वनि की कंपन (Vibration) मस्तिष्क की नसों को आराम देती है। यह माइग्रेन के दर्द को कम करने और मानसिक थकान मिटाने में बहुत प्रभावी है। आर्ट ऑफ लिविंग के विशेषज्ञ इसे तनाव जनित सिरदर्द के लिए विशेष रूप से सुझाते हैं।
इसे करने की सरल विधि इस प्रकार है:
1. आरामदायक स्थिति में बैठें और आँखें बंद कर लें।
2. अपनी तर्जनी उंगलियों (Index fingers) को कानों के कार्टिलेज पर रखें।
3. एक गहरी लंबी सांस लें।
4. सांस छोड़ते हुए मधुमक्खी की तरह “हम्म… (Hmm…)” की गुंजन करें।
इस प्रक्रिया को 3 से 5 बार दोहराएं।
आमतौर पर यह सभी के लिए सुरक्षित है, लेकिन निम्नलिखित स्थितियों में सावधानी बरतें:
1. बहुत अधिक कान में संक्रमण (Ear infection) होने पर इसे न करें।
2. इसे बहुत ज़ोर लगाकर या फेफड़ों पर दबाव डालकर न करें।
3. अभ्यास करते समय उंगली को कान के छेद के अंदर न डालें, केवल कार्टिलेज पर हल्के से दबाएं।
जी हाँ, बच्चों के लिए भ्रामरी प्राणायाम अत्यंत लाभकारी है। यह उनकी एकाग्रता (Concentration) बढ़ाता है, पढ़ाई के तनाव को कम करता है और उनकी याददाश्त को तेज करने में मदद करता है। आर्ट ऑफ लिविंग के ‘उत्कर्ष’ और ‘मेधा’ योग शिविरों में इसे विशेष रूप से सिखाया जाता है।
वैसे तो इसका अभ्यास कभी भी किया जा सकता है, लेकिन सुबह खाली पेट या रात को सोने से ठीक पहले करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। यदि आप दिन भर काम के बीच में तनाव महसूस करें, तो 2 मिनट का भ्रामरी प्राणायाम आपको तुरंत तरोताजा कर सकता है।

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