श्री श्री रवि शंकरजी ने नार्वे की संसद को संबोधित किया | Sri Sri Ravi Shankar addresses Norway parliament

श्री श्री ने नार्वे की संसद में विभाजनकारी नीतियों के बजाय शांति प्रक्रिया अपनाने को कहा

बैंगलौर अक्टोबर 2016. आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता गुरूदेव श्री श्री रवि शंकर अपने यूरोपियन देशों के दौरे को समाप्त किया। इस दौरे में श्री श्री ने आतंक प्रभावित फ्रांस, पौलेंड, स्वीडन और अंत में उगते सूरज के देष नार्वे की यात्रा करते हुए कई विख्यात विष्वविद्यालयों, संसदों में अपने षोति और सद्भाव के मंतव्य को हजारों लोगों तक पहुॅंचाया।

नार्वे में गुरूदेव ने वहॉं के संसद के अध्यक्ष श्री ओलिमिक थामसेन से मुलाकात की और संसद को संबोधित किया। इस घटना बाद में एक गर्म बहस में बदल गई जब पाक अधिकृत कश्मीर के अध्यक्ष श्री मसूद खान ने इस अवसर पर बोलना प्रारंभ कर दिया। श्री श्री और संसद सदस्य श्रीमती सेल्वी ग्राहम ने मिलकर इस बहस को इस ओर प्रेरित किया कि एक होकर ही आतंकवाद और गरीबी से लडा जा सकता है। इसके अलावा उन्हौने जोर दिया कि समाज के लोग आपस  में यदि शांति और सद्भाव चाहते हैं तो वे अपनी समानता पर ज्यादा ध्यान देवें न कि अपनी भिन्नता पर।

इससे पहले सोमवार को श्री श्री ने आम जन को सम्बोधित किया और बाद में प्रधानमंत्री के सचिव द्वारा आयोजित दोपहर का भोजन लिया। मंगलवार को गुरूदेव नार्वे की ओलम्पिक समिति के प्रमुख श्री इंगे एंडरसन व ओलम्पिक पदक विजेता कजटेल व आमेाड से भी मिले। वहॉं पर यह निर्णय भी लिया गया कि आर्ट ऑफ लिविंग और नार्वे की ओलम्पिक समिति मिलकर एथलिटों के लिए आत्मविश्वास निर्माण के लिए कार्य करेंगे।

- आर्ट ऑफ लिविंग ब्यूरो ऑफ़ कम्युनिकेशन

अगले लेख

एफएआरसी (FARC) और कोलम्बियन सरकार के मध्य 26 सितम्बर को कार्टेजीना-डी-इंडीस में ऐतिहासिक 52 वर्षीय विवाद शांति समझौते के हस्ताक्षर के साथ औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। इस कार्यक्रम के लिए कोलम्बिया के राष्ट्र्पति द्वारा गुरूदेव श्री श्री रविशंकर जी को आमंत्रित किया गया था।

आर्ट आॅफ लिविंग के प्रणेता और आध्यात्मिक संत श्री श्री रविशंकरजी द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लाने का अकल्पनीय कार्य किया है। इन वर्गो में पूर्व अलगाववादी, आतंक के शिकार लोग, युवा, महिलाएॅं, उद्यमी, काष्मीर के गैर सरकारी संगठन, सुफी लीडर, सेवानिवृत्त कर्मचारी, सिख समुदाय के लोग सभी ने मिलकर काश्मीर में ‘स्वर्ग की वापसी’ सम्मेलन में अपनी भागीदारी दी और चर्चा में भाग लिया।

 

कार्यकम के कुछ अंश:

  1. जीवन की रोज़ाना चुनौतियों का सामना करने का व्यवहारिक ज्ञान।
  2. इंटरैक्टिव अभ्यास
  3. योगासन और विश्रामदायक शारीरिक व्यायाम।
  4. ध्यान और प्रभावशाली श्वास प्रक्रियाएं।
  5. सुदर्शन क्रिया

सुदर्शन क्रिया एक सहज लयबद्ध शक्तिशाली तकनीक है जो विशिष्ट प्राकृतिक श्वांस की लयों के प्रयोग से शरीर, मन और भावनाओं को एक ताल में लाती है। यह तकनीक तनाव, थकान और नकारात्मक भाव जैसे क्रोध, निराशा, अवसाद से मुक्त कर शांत व एकाग्र मन, ऊर्जित शरीर, और एक गहरे विश्राम में लाती है।

‘श्री श्री योग’ योग में उपस्थित आन्तरिक विविधता का एक सरल और खुशहाल उत्सव है। यहां योग की विभिन्न मौलिक आवश्यकताएं, जैसे कि श्वास की विधियाँ, योगासन, ध्यान, विश्राम एवं योगिक ज्ञान इत्यादि का समन्वय किया जाता है । योग के इन सभी सुन्दर रूपों को अपनाकर हम सभी शारीरिक स्तर के पार भी देख पाते हैं और अपने अस्तित्व के सूक्ष्म स्तर के प्रति और सचेत एवं संवेदनशील बन जाते हैं।

‘सहज’ एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है ‘प्राकृतिक’ या ‘ जो बिना किसी प्रयास के किया जाए’| ‘समाधि’ – एक गहरी, आनंदमयी और ध्यानस्थ अवस्था है| अतः ‘सहज समाधि’ वह सरल प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हम आसानी से ध्यान कर सकते हैं|

ध्यान करने से सक्रिय मन शांत होता है, और स्वयं में स्थिरता आती है|जब मन स्थिर होता है, तब उसके सभी तनाव छूट जाते हैं, जिससे हम स्वस्थ और केन्द्रित महसूस करते हैं|

 

 

योग सीखने हेतु / जानकारी हेतु फॉर्म भरे

योग (योगाभ्यास) सीखने के लिए / जानकारी के लिए  निम्नलिखित फॉर्म भरे !!