स्वच्छता को सुलभ बनाना

शौचालय के माध्यम से खुले में शौच से मुक्ति

दान करेंहमारे साथ जुड़ें

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चुनौती

भारत में 62.6 करोड़ लोग खुले में शौच करने के कारण गंभीर बीमारियों और प्रदूषण से ग्रस्त हैं।

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रणनीति

समुदायों के लिए शौचालयों की सुविधा उपलब्ध करवाना और उन्हें उनका उपयोग करने के लिए प्रेरित करना।

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प्रभाव

भारत के 9 राज्यों में 62,000 से अधिक शौचालयों का निर्माण।

परिचय

वर्ष 2010 में भारतीय सांख्यिकीय आंकड़ों पर आधारित संयुक्त राष्ट्र के एक अनुमान के अनुसार लगभग 62.6 करोड़ लोग खुले में शौच करते थे। विश्व भर में खुले में शौच करने वाली जनसंख्या का 60% भारत में है। इसके कारण प्रदूषण के साथ साथ समुदायों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह लोगों में अतिसार/ दस्त रोग का प्रमुख कारण है, जो लोगों में कुपोषण भी लाता है। विभिन्न अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि खुले में शौच करना महिलाओं में खराब सेहत का कारण बनता है, जो दीर्घकाल में उनके मानसिक-सामाजिक कल्याण पर भी विपरीत असर करता है।

आर्ट ऑफ लिविंग ने वर्ष 1999 में, अपने सहयोगी संगठन, इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन वैल्यूज़ (IAHV) के साथ मिलकर इस अपर्याप्त सफाई व्यवस्था का समाधान खोजने के लिए अपना 5H कार्यक्रम आरम्भ किया था, जिसका उद्देश्य विश्व भर के ग्रामीण क्षेत्रों से गरीबी व दुर्गति को मिटाना तथा बीमारियों की रोकथाम करना है (यह 5H कार्यक्रम अब आदर्श ग्राम कार्यक्रम में परिवर्तित हो गया है)। तब से ही हम अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व सहयोगियों के साथ मिलकर शौचालयों का निर्माण करवा रहे हैं।

हम स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत भी गाँवों को खुले में शौच से मुक्त करने के उद्देश्य से भारत सरकार के साथ मिलकर स्वच्छ भारत अभियान में उनका सहयोग कर रहे हैं। हमारे युवा कार्यकर्ता इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक फील्ड का कार्य करते हैं और उनका दीर्घकालीन स्थायित्व सुनिश्चित करते हैं।

ग्रामीण विकास

गांवों में परिवर्तन लाएं

ग्रामीण भारत में सौर प्रकाश, शौचालय की सुविधा, मजबूत स्थानीय प्रशासन एवं और भी बहुत कुछ लाएं।

दान करें

स्वस्थ जीवन और बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को शौचालयों का इस्तेमाल करना चाहिए।

- गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

रणनीति

हमारी रणनीति:

टीम बनाना: हम अपने कर्म योग कार्यक्रम (पूर्व YLTP) के अंतर्गत युवा नेतृत्व तैयार करते हैं, जो ग्राम प्रशासकों/ प्रबंधकों के साथ मिलकर इस परियोजना को चलाते हैं। वे प्रारंभिक सर्वेक्षणों से लेकर लोगों को शौचालयों के निर्माण के लिए प्रेरित करने और गाँवो को खुले में शौच से मुक्त रखने तक, परियोजना के विभिन्न स्तरों पर कार्य करते हैं।

सर्वेक्षण के मूल्यांकन की आवश्यकता: युवा नेता ग्रामीणों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थिति को समझने के लिए सर्वेक्षण करते हैं। इससे उस क्षेत्र के लिए वांछित स्वच्छता और स्वास्थ्य रक्षा संबंधी आवश्यकताएँ समझ कर उनके लिए योजनाएँ बनाने में सहायता मिलती है। सर्वेक्षण कार्य से उन लाभार्थियों की सूची तैयार करने में भी सहायता मिलती है, जिनके लिए शौचालयों का निर्माण किया जाना है।

सजगता अभियान: हमारा अगला कदम ग्रामीण समुदायों को स्वास्थ्य रक्षा और स्वच्छता जैसे विषयों पर शिक्षित करना और शौचालयों के उपयोग के महत्व को साझा करना होता है। हम यह कार्य नुक्कड़ नाटकों, पद यात्राओं और योग व ध्यान कार्यक्रमों के माध्यम से करते हैं। हम समाज के सदस्यों के साथ सफाई अभियानों द्वारा भी संपर्क में रहते हैं। युवा नेता गाँव के सभी हितधारकों, जैसे कि पंचायत, स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों के साथ मिलकर काम करते हैं, ताकि सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि गाँव को खुले में शौच से मुक्त करना है।

शौचालय निर्माण कार्य: स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत भारत सरकार शौचालय निर्माण को प्रायोजित करती है। कुछ मामलों में हम सीधे तौर पर भी उनका निर्माण करवाते हैं। जिन घरों में पानी की सीधी सप्लाई नहीं होती, उनके लिए हमने पूर्वनिर्मित शौचालयों का निर्माण करवाया है क्योंकि उनमें कम पानी की आवश्यकता होती है और जहाँ पानी की कमी नहीं है, वहाँ ईंट-पत्थर के शौचालय बनवाए हैं।

हमारा दृष्टिकोण

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टीम का निर्माण

कर्म योग के माध्यम से

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सर्वेक्षण के मूल्यांकन की आवश्यकता

ग्रामीणों की वस्तुस्थिति को समझने के लिए

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सजगता अभियान

स्वच्छता और स्वास्थ्य रक्षा की शिक्षा

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शौचालय निर्माण कार्य

बिना जलापूर्ति वाले घरों के लिए भी

प्रभाव

62,000

से अधिक

शौचालय निर्मित

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