शोरगुल में ध्यान कैसे करें ? | How to meditate in noisy places?

अगर आप ध्यान, साधना  करते समय बाहरी वातावरण के शोरगुल से परेशान अथवा गुस्से हो जाते हैं और  ठीक से ध्यान नहीं कर पाते, तो निराश न होएं - आप अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं। ऐसा बहुत से लोगों के साथ होता है। उनके साथ भी जो बहुत समय से ध्यान कर रहे हैं। निम्नलिखित कुछ सुझाव आपको बाहरी वातावरण के शोर गुल में भी साधना करने के लिए सहायता दे सकते हैं।

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बाहरी शोरगुल का सामना करना | Dealing With The Noise Outside

  • बाहर के शोरगुल से लड़िये नहीं अपितु उसकी मौजूदगी को स्वीकार करें । Acknowledge the noise and stop fighting it: श्री श्री कहते हैं की आप जिस किसी भी चीज़ का जितना विरोध करेंगे उतनी ही अधिक वो बनी रहेगी। इसका अर्थ यह हुआ कि जितना अधिक आप बाहरी शोर से लड़ेंगे, उसे दूर भगाने की कोशिश करेंगे, उतना ही अधिक वो आपको परेशान करेगा। अतः शोरगुल से लड़ने की बजाय, उसकी उपस्थिति से अवगत हो जाएँ उसकी मौजूदगी को स्वीकार करें। धीरे धीरे अपना ध्यान शोरगुल की तरफ ले जाएँ , प्रत्येक आवाज़ का अनुभव करें और अपने श्वास पर ध्यान ले जाएँ। ऐसा करने से आप स्वतः वर्तमान क्षण में आ जाएंगे और आपका मन नहीं भटकेगा। फिर एक ऐसा क्षण आएगा जब आप शोर से परे चले जाएंगे और वो आपको परेशान नहीं कर सकेगा।
  • हैडफ़ोन का उपयोग करें । Slip Headphones Over Your Ears: अगर आपने अभी ध्यान करना प्रारम्भ किया है तो आप शुरुआत में हैडफ़ोन का उपयोग कर सकते हैं और अपने फ़ोन पर गाइडेड मैडिटेशन चला सकते हैं।
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अपने मन के अंदर के शोर से निपटना । Dealing With Noise Inside Your Mind?

अगर आपको ध्यान करते समय अनेकों विचार आते हैं और परेशान करते हैं, तो निम्नलिखित उपाय अपना सकते हैं।

  • व्यायाम करें | Physical Exercise: थोड़ा बहुत व्यायाम, योगासन आपके मन को शांत व शरीर को स्थिरता प्रदान करेगा। कुछ क्षणों के लिए प्राणायाम करना अति लाभदायक होता है।
  • सही भोजन करें  | Food That You Eat: एक उत्तम ध्यान के लिए हरी सब्ज़ियों, फल, दाल व अनाज युक्त शाकाहारी भोजन करें।
  • शोर से लड़िये नहीं | Do Not Fight Back The Chatter: अधिकतर जब हमारा मन में अनेकों विचार आते हैं या तो हम उन्हें दबाने का प्रयत्न करते हैं अथवा उनसे भिड़ कर उन्हें अच्छे या बुरे समझने लगते हैं। इन्हें इस तरह दबा देने से कोई लाभ नहीं क्योंकि आप जितना इन्हें दबाने का प्रयास करेंगें उतने ही यह और अधिक बलवान हो जाएँगे किन्तु जब हम इन्हें स्वीकार कर लेते हैं, इनकी मौजूदगी के प्रति सजग हो जाते हैं तो हम स्वतः ही इनके पार चले जाते हैं। इससे हमारा मन वर्तमान क्षण में ठहरने लगता है।

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विचारों के प्रति सजगता, उन्हें ध्यान से देखना और स्वीकार करना | Follow the AOA! (Aware, Observe and Accept)

  • सबसे उत्तम मंत्र है कि आप अपने विचारों के प्रति सजग बने, उन्हें ध्यानपूर्वक देखें व स्वीकार करें। ऐसा करने से आप बड़े ही आराम से उनके पार चले जाएंगे।

 

ऑनलाइन निर्देशित ध्यान की प्रक्रिया से ध्यान की गहराइयों का अनुभव करें। आप अपने नज़दीक होने वाले अगले सहज समाधि कोर्स में भाग ले सकते हैं और ध्यान करना सीख सकते हैं।

श्री श्री रवि शंकर के ज्ञान वार्ता से प्रेरित | Graphics by Niladry Dutta