शलभासन करते समय शरीर का आकार शलभ (कीट) की तरह होने से, इसे शलभासन कहा जाता हैं। कमर और पीठ के मजबूत करता है और पाचन क्रिया को सुधारता है।

दैनिक श्री श्री योग
श्री श्री योग स्कूल के अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपने सुविधानुसार समय पर दैनिक योगाभ्यास सीखें।
शलभासन कैसे करें
- पेट के बल लेट जाएँ, सिर एक ओर घुमाएँ और हाथों को शरीर के साथ रखें तथा हथेलियाँ ऊपर की ओर रखें।
- सिर को घुमाएँ और अपनी ठोड़ी को जमीन पर रखें। अपने हाथों को अपनी जांघों के नीचे रखें और हथेलियों को अपनी जांघों के ऊपर धीरे से दबाएँ।
- धीरे धीरे साँस लें और फिर सिर, छाती और पैरों को फर्श से जितना संभव हो उतना ऊपर उठाएँ। अपने सिर को जितना हो सके पीछे की ओर झुकाएँ। अपने पैरों, घुटनों और जांघों को एक साथ दबाए रखें।
- सिर के ऊपर से शुरू करके पैरों तक आते हुए, अपने शरीर के प्रत्येक भाग पर अपना ध्यान केंद्रित करें, अगले भाग पर जाने से पहले सचेत रूप से उसे शिथिल करें।
- साँस रोकते हुए इसी आसन में बने रहें। आप अपने हाथों को जांघों पर ऊपर की ओर दबाकर अपने पैरों को सहारा दे सकते हैं।
- इस आसन में तब तक रुकें जब तक आप साँस को अंदर रोक सकें, फिर साँस छोड़ते हुए धीरे धीरे पैरों, छाती और सिर को फर्श पर वापस लाएँ।
- अपने हाथों को अपनी जांघों के नीचे से हटा लें और भुजाओं को अपने शरीर के साथ रखें। अपना सिर एक तरफ मोड़ें और आराम करें।
अवधि / पुनरावृत्तियाँ :
इस मुद्रा में तब तक बने रहें जब तक आप साँस को रोक सकें। शलभ आसन को तीन बार दोहराएँ।
शलभासन के लाभ
- सम्पूर्ण पीठ में लचीलापन और शक्ति बढ़ती है।
- कंधों और भुजाओं को मजबूत बनाता है।
- विशेष रूप से गर्दन और कंधों की नसों और माँसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- पेट के अंगों की मालिश और टोनिंग करता है और पाचन में सुधार करता है।
- यह पेट और आंतों को उत्तेजित करता है, जिससे जठरांत्रीय गैस से राहत मिलती है, मूत्राशय को मजबूत करता है और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव पैदा करता है।












